ईरान-इजरायल जंग का असर: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे या देश है पूरी तरह तैयार?

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: 25 दिन का स्टॉक और 74 दिन की रणनीतिक ताकत-मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन भारत की स्थिति फिलहाल संतुलित बताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे तुरंत किसी बड़े संकट की आशंका कम है। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
25 दिन का तेल स्टॉक और 74 दिन की रणनीतिक तैयारी-सरकार के मुताबिक भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चा तेल स्टॉक में है और लगभग 25 दिन का तेल समुद्री रास्ते में ट्रांजिट में है। तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया कि देश का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व आपात स्थिति में 74 दिन तक जरूरतें पूरी कर सकता है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भूमिगत भंडार मौजूद हैं, जबकि ओडिशा में नई सुविधा पर काम चल रहा है। रिफाइनरियों में रखे स्टॉक को भी इसमें जोड़ा जाता है।
मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच भारत की मजबूत पकड़-भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है। सरकार ने 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है जो पूरे देश में तेल की उपलब्धता पर नजर रख रहा है। सरकार का कहना है कि आम लोगों के हितों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर चरणबद्ध कदम उठाए जाएंगे।
होरमुज जलडमरूमध्य पर संकट और जहाजों की आवाजाही प्रभावित-तनाव तब बढ़ा जब ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सामान्य दिनों में जहां 100 से ज्यादा जहाज रोज गुजरते थे, अब मुश्किल से एक-दो टैंकर निकल पा रहे हैं। कई जहाज दोनों ओर फंसे हुए हैं और हमलों की खबरें भी आई हैं।
भारत क्यों है अपेक्षाकृत टेंशन फ्री?-पिछले कुछ सालों में भारत ने तेल खरीदने के स्रोत बढ़ाए हैं। अब भारतीय कंपनियां ऐसे देशों से भी तेल ले रही हैं जिनकी सप्लाई इस समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है। 25 दिन का स्टॉक, 25 दिन का ट्रांजिट और 74 दिन की रणनीतिक क्षमता फिलहाल भारत को राहत दे रही है। अगर हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते तो तुरंत बड़ी किल्लत की संभावना कम मानी जा रही है।
पेट्रोल-डीजल के दाम पर विशेषज्ञों की राय-ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही जंग जैसे हालात बनते हैं, तेल की कीमतें चढ़ने लगती हैं। अगर सप्लाई कम होने का डर पैदा हो जाए तो बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश में इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और फिर रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं।
खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा तनाव-यह संकट उस एयरस्ट्राइक के बाद और गहरा गया जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य नेतृत्व की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा की। इस फैसले ने वैश्विक बाजारों में ऊर्जा संकट की आशंका को और तेज कर दिया है। हालांकि भारत फिलहाल अपनी तैयारी के दम पर स्थिति को संभाले हुए है।
मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखा है। पर्याप्त तेल भंडार और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों के कारण देश किसी भी अल्पकालिक संकट का सामना कर सकता है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों तक असर पहुंचा सकती है, इसलिए सरकार सतर्कता से स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



