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नेपाल के चुनाव में बड़ा बदलाव: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की जबरदस्त बढ़त और नई राजनीतिक दिशा

नेपाल की संसदीय राजनीति में इस बार चुनाव परिणामों ने एक बड़ा बदलाव दिखाया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी तेजी से दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रही है। सोमवार सुबह तक आए नतीजों के मुताबिक पार्टी ने प्रत्यक्ष और अनुपातिक दोनों मतदान में भारी वोट हासिल किए हैं। इन नतीजों के बाद देश में नई राजनीतिक दिशा तय होने की चर्चा जोर पकड़ रही है।

प्रत्यक्ष मतदान में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की जबरदस्त जीत-सोमवार सुबह 7 बजे तक आए नतीजों के अनुसार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने प्रत्यक्ष मतदान में शानदार प्रदर्शन किया है। अब तक पार्टी ने 124 सीटें जीत ली हैं और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। इसके मुकाबले नेपाली कांग्रेस काफी पीछे नजर आ रही है, जिसने केवल 17 सीटें जीती हैं और एक सीट पर बढ़त है। यह साफ दिखाता है कि जनता ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को भारी समर्थन दिया है।

अन्य राजनीतिक दलों का कमजोर प्रदर्शन-इस चुनाव में कई पुराने और बड़े दल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। सीपीएन-यूएमएल ने आठ सीटें जीती हैं और एक सीट पर बढ़त है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को सात सीटें मिली हैं। श्रम संस्कृति पार्टी ने तीन सीटें हासिल की हैं, जबकि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक सीट मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने सभी को पीछे छोड़ दिया है।

165 में से 161 सीटों के नतीजे घोषित, बाकी का इंतजार-नेपाल की संसद के लिए कुल 165 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान हुआ था। अब तक 161 सीटों के नतीजे आ चुके हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक बाकी चार सीटों के नतीजे सोमवार दोपहर तक आने की उम्मीद है। अंतिम परिणाम आने के बाद संसद की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।

अनुपातिक मतदान में भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को भारी समर्थन-अनुपातिक मतदान प्रणाली में भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को जबरदस्त वोट मिले हैं। अब तक पार्टी को 37,89,803 वोट मिले हैं। नेपाली कांग्रेस को 12,75,594 वोट मिले हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल को 10,79,726 और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को 5,55,300 वोट मिले हैं। यह आंकड़े पार्टी की लोकप्रियता को और मजबूत करते हैं।

अन्य पार्टियों को भी मिले लाखों वोट-अनुपातिक मतदान में कुछ अन्य पार्टियों को भी अच्छी संख्या में वोट मिले हैं। श्रम संस्कृति पार्टी को 2,65,398 वोट मिले हैं, जनता समाजवादी पार्टी को 1,16,463 और राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी को 1,08,084 वोट मिले हैं। हालांकि, इन पार्टियों का वोट प्रतिशत राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की तुलना में काफी कम है।

नेपाल को मिल सकता है पहला मधेसी प्रधानमंत्री-इन चुनाव परिणामों के बाद नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बलेंद्र शाह देश के पहले मधेसी प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यह नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ होगा और मधेसी समुदाय के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।

सबसे युवा कार्यकारी प्रमुख बनने की संभावना-अगर बलेंद्र शाह प्रधानमंत्री बने, तो वह नेपाल के इतिहास के सबसे युवा निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख भी बन जाएंगे। इससे देश की राजनीति में नई पीढ़ी के नेतृत्व को एक मजबूत संदेश मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव नेपाल की राजनीति को नई दिशा देगा और शासन में नए विचारों को जगह मिलेगी।

नेपाल के इस चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की जबरदस्त जीत ने देश की राजनीति में नया अध्याय शुरू कर दिया है। बलेंद्र शाह के नेतृत्व में मधेसी समुदाय को पहली बार शीर्ष पद मिल सकता है, जो देश के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। आने वाले समय में नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और दिशा देखने को मिलेगी।

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