UN Security Council Reform: संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की मांग, जयशंकर बोले- बिना सुधार के कमजोर होगी UN की ताकत

भारत ने UN सुरक्षा परिषद में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया, एस जयशंकर ने कहा- पुरानी व्यवस्था से विश्वसनीयता घटेगी-भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जब तक इस संस्था की संरचना में बदलाव नहीं होगा, तब तक उसकी विश्वसनीयता और प्रभाव सीमित रहेंगे। BRICS देशों की बैठक में जयशंकर ने साफ कहा कि दुनिया बदल चुकी है, लेकिन वैश्विक संस्थाएं पुराने ढांचे पर ही काम कर रही हैं।
बदलती दुनिया के साथ नहीं बदली वैश्विक संस्थाएं-BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया पहले से ज्यादा जुड़ी, जटिल और बहुध्रुवीय हो गई है। लेकिन जिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का गठन दशकों पहले हुआ था, वे अब भी पुराने ढांचे में काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक शासन की प्रभावशीलता और बहुपक्षीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए सुधार अब बेहद जरूरी हो गया है।
UN Security Council में विस्तार की मांग-जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सदस्य संख्या और जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं, लेकिन सुरक्षा परिषद अभी भी पुराने समय की तस्वीर पेश करती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार होना चाहिए। भारत का मानना है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है, तभी UN वैश्विक संस्था कहलाएगा।
भारत लंबे समय से कर रहा स्थायी सदस्यता की मांग-भारत लंबे समय से UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता आ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में भारत चाहता है कि विकासशील देशों की आवाज को बराबर महत्व मिले। जयशंकर ने कहा कि BRICS मंच पर भी इस मुद्दे पर कई बार चर्चा हो चुकी है और कई देशों ने सुधार की जरूरत पर सहमति जताई है।
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक ढांचे में भी बदलाव जरूरी-विदेश मंत्री ने कहा कि सिर्फ संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में भी सुधार की जरूरत है। दुनिया सप्लाई चेन संकट, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। इसलिए वैश्विक आर्थिक संस्थाओं को समय के हिसाब से बदलना होगा ताकि विकासशील देशों की समस्याओं का सही समाधान मिल सके।
व्यापार प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर-जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में कई असमानताएं हैं। कुछ देशों के गैर-बाजार व्यवहार और सप्लाई चेन पर नियंत्रण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने WTO को मजबूत बनाने की बात कही और कहा कि व्यापार व्यवस्था निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी देशों के लिए समान अवसर देने वाली होनी चाहिए।
विकासशील देशों की आवाज को मिले महत्व-भारत ने साफ कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार के दौरान विकासशील देशों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई देशों को बराबर अवसर नहीं मिल पाते। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों को ज्यादा समावेशी और संतुलित बनाया जाए ताकि बेहतर सहयोग और स्थिरता कायम हो सके।



