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NEET पेपर लीक विवाद में घिरे धर्मेंद्र प्रधान, कांग्रेस ने दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस

NEET पेपर लीक मामले ने बढ़ाई सियासत-NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस विवाद के बीच कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक बयान को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस के राज्यसभा मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को नोटिस सौंपा है, जिसमें मंत्री की टिप्पणी को आपत्तिजनक बताया गया है।

विवाद की शुरुआत क्या थी?-15 मई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उनसे पूछा गया कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को क्यों लागू नहीं किया गया, जो कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में काम कर रही थी। इस सवाल पर मंत्री ने विवादित जवाब दिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?-धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे संसदीय स्थायी समिति की टिप्पणियों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि इनमें विपक्षी सांसद भी होते हैं जो अपनी बात अलग तरीके से रखते हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर बात करेंगे। इस जवाब को कांग्रेस ने संसदीय संस्थाओं का अपमान माना है।

जयराम रमेश ने बयान को बताया अपमानजनक-कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंत्री के बयान को बेहद गंभीर और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां संसद का ही हिस्सा हैं और उन्हें मिनी पार्लियामेंट कहा जाता है। मंत्री द्वारा उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतंत्र और संसद का अपमान है, जो सांसदों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

संसद और लोकतंत्र के खिलाफ माना गया बयान-जयराम रमेश ने नोटिस में लिखा कि कार्यपालिका की जवाबदेही संसद और उसकी समितियों के प्रति लोकतंत्र की सबसे अहम व्यवस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान की टिप्पणियां संसद और संसदीय संस्थाओं का सम्मान नहीं करतीं और जानबूझकर समिति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं।

संसदीय समितियों पर टिप्पणी को गंभीर मामला बताया-कांग्रेस ने कहा कि संसदीय समितियों और उनके सदस्यों पर अपमानजनक टिप्पणी संसद की अवमानना है। मंत्री ने समिति के सदस्यों की नीयत पर सवाल उठाए हैं, जो सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं बल्कि संसद की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिस पर कार्रवाई जरूरी है।

राज्यसभा नियम 187 के तहत शिकायत दर्ज-जयराम रमेश ने राज्यसभा के नियम 187 का हवाला देते हुए सभापति को नोटिस दिया है। उन्होंने मांग की है कि धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का मामला चलाया जाए। शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति राज्यसभा की आठ प्रमुख समितियों में से एक है, इसलिए मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

NEET पेपर लीक को लेकर पहले से घिरी है सरकार-NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद से केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विपक्ष के निशाने पर हैं। छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है कि इतनी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था क्यों फेल हुई। विपक्ष लगातार जवाब मांग रहा है कि चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

अब आगे क्या हो सकता है?-यह मामला अब राज्यसभा सभापति के पास है। अगर वे नोटिस स्वीकार करते हैं तो धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और ज्यादा हंगामा देखने को मिल सकता है, क्योंकि विपक्ष पहले से ही NEET मामले को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

 

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