MP के शिक्षकों को बड़ा झटका, TET हुआ जरूरी

मध्य प्रदेश के 1.5 लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, अब TET पास करना होगा जरूरी-मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया। राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों ने TET अनिवार्यता में छूट की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले के फैसले में ही पर्याप्त राहत दी जा चुकी है। अब सभी शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार-सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि TET अनिवार्यता में कोई और ढील नहीं दी जाएगी। पहले के फैसले में ही शिक्षकों को पर्याप्त राहत दी गई है। राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों की मांगों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET जरूरी है। अब सभी नए और पुराने शिक्षक नियमों का पालन करेंगे।
बिना TET पास किए नौकरी नहीं मिलेगी-कोर्ट ने साफ किया है कि भविष्य में बिना TET पास किए किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं होगी। यह नियम नए शिक्षकों के साथ-साथ पुराने शिक्षकों पर भी लागू होगा। जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पहले TET पास करना अनिवार्य होगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में कड़ाई बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी।
पुराने शिक्षकों को भी TET पास करना होगा-2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी TET पास करना जरूरी होगा। कई शिक्षक संगठनों ने पुराने शिक्षकों को छूट देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि कुछ मामलों में राहत दी गई है। इससे हजारों पुराने शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि उन्हें भी अपनी पात्रता साबित करनी होगी।
शिक्षकों को मिली समय सीमा में थोड़ी राहत-सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने के लिए शिक्षकों को अतिरिक्त समय दिया है। पहले पात्रता परीक्षा की वैधता दो साल थी, जिसे बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। अब शिक्षकों के पास 31 अगस्त 2028 तक TET पास करने का मौका है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिली है जो तैयारी के लिए ज्यादा समय चाहते थे।
5 साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को छूट-उन शिक्षकों को राहत दी गई है जिनकी सेवा अवधि पांच साल से कम है। इन्हें TET पास करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। हालांकि, बिना TET पास किए वे पदोन्नति का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इससे कुछ शिक्षकों को आंशिक राहत मिली है, लेकिन प्रमोशन में बाधा बनी रहेगी।
2025 के फैसले पर आधारित है नया आदेश-यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले पर आधारित है, जिसमें क्लास 1 से 8 तक पढ़ाने वाले इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किया गया था। पुनर्विचार याचिका में इस फैसले को चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले ही पर्याप्त राहत दी जा चुकी है और अब कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता, सरकार ने दिया भरोसा-इस फैसले के बाद हजारों शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। कई शिक्षक अब TET की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं, समय सीमा बढ़ने और पांच साल की छूट से कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी।



