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G7 समिट में मोदी की कूटनीतिक सक्रियता

 

G7 समिट में पीएम मोदी की कूटनीतिक सक्रियता, वैश्विक नेताओं से मुलाकात कर भारत के रिश्तों को नई दिशा दी-फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूती से पेश किया। इस सम्मेलन में उन्होंने कनाडा, यूएई, ब्रिटेन, जापान, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।G7 समिट सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारत के लिए अपने वैश्विक साझेदारों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने का भी एक बड़ा अवसर साबित हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इन मुलाकातों में आपसी विश्वास, साझा विकास और दीर्घकालिक साझेदारी के आधार पर संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। ये बैठकें भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता का प्रतीक हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा-G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की, जो पिछले एक साल में दोनों नेताओं की चौथी बैठक थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग की प्रगति पर चर्चा हुई।दोनों नेताओं ने पिछले कुछ महीनों में हुए विकास कार्यों और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार हो रही उच्चस्तरीय बैठकों से दोनों देशों के बीच संवाद बेहतर हुआ है, जो व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई मजबूती देगा। यह बैठक भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर-प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। भारत-यूएई के संबंध पिछले वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं और यह बैठक इस साझेदारी को और गहरा करने का अवसर बनी।प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में बसे भारतीय समुदाय के लिए वहां की सरकार के सहयोग की सराहना की। यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों की एक अहम कड़ी हैं। इस बैठक ने दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार-ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ हुई बैठक में भारत-यूके के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक समझौतों और आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन समझौतों से दोनों देशों के बीच नए अवसर पैदा हुए हैं।बैठक में निवेश, नवाचार, उद्योग और रोजगार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया ताकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा।

जापान के प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ तकनीक और निवेश पर सहमति-प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की। भारत-जापान के बीच पहले से कई बुनियादी ढांचा और तकनीकी परियोजनाएं चल रही हैं।दोनों नेताओं ने नई तकनीकों और आधुनिक उद्योगों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। यह बैठक भारत-जापान के रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो दोनों देशों के विकास में मददगार साबित होगी।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा-प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-मिस्र के पुराने मित्रतापूर्ण संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। व्यापार, कृषि, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।मिस्र अफ्रीका और पश्चिम एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। इस बैठक ने दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है।

केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो के साथ ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर बातचीत-प्रधानमंत्री मोदी ने केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो से मुलाकात की, जिसमें विकासशील देशों के मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल विकास और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। भारत और केन्या के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं, और यह बैठक इस सहयोग को और बढ़ावा देने का अवसर बनी।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ भविष्य की तकनीकों पर फोकस-प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।दक्षिण कोरिया तकनीकी नवाचार में अग्रणी है और दोनों देशों के बीच यह साझेदारी भारत की तकनीकी और औद्योगिक विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक ने भविष्य की तकनीकों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रभाव-G7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी की ये सभी मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि भारत वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है। व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में बढ़ते संवाद भारत के लिए नए अवसर लेकर आएंगे।विशेषज्ञ मानते हैं कि इन बैठकों से भारत की वैश्विक छवि और मजबूत होगी और देश क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी कूटनीतिक सक्रियता को और बढ़ाएगा।

 

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