Google Analytics Meta Pixel
International
Trending

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से तेल बाजार में राहत

 

अमेरिका-ईरान शांति के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, तेल बाजार में आई तेजी से राहत-पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह मार्ग दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल आपूर्ति लाइन माना जाता है। इस खबर से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी से बदलाव आया और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?-होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग से अपना तेल दुनिया भर में भेजते हैं। जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। इस साल भी अमेरिका-ईरान टकराव और इजरायल-ईरान तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ी थीं। अब जलडमरूमध्य के खुलने से बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

होर्मुज खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को क्या फायदा?-होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति फिर से सुचारू होगी। इससे ऊर्जा बाजार में भरोसा बढ़ेगा और सप्लाई बाधित होने का खतरा कम होगा। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर से गिरकर करीब 78-80 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ेगा। परिवहन और उत्पादन लागत कम होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। हालांकि यह अंतिम समाधान नहीं है, क्योंकि अभी कई मुद्दे बातचीत के दौर में हैं।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?-भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बदलाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर असर डालता है। हालिया गिरावट से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जल्द बड़ी कटौती की उम्मीद कम है, क्योंकि कंपनियां पुराने खर्चों को संतुलित करेंगी। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 80 डॉलर से नीचे बना रहता है, तो आने वाले महीनों में आम लोगों को राहत मिल सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?-तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल पर बड़ा असर पड़ेगा। कम कीमत पर तेल खरीदने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और चालू खाते के घाटे पर नियंत्रण मिलेगा। साथ ही महंगाई दर कम हो सकती है क्योंकि ईंधन सस्ता होने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। उद्योगों की उत्पादन लागत कम होने से आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। सरकार के लिए भी यह राहत की बात है क्योंकि ऊर्जा सब्सिडी का बोझ कम होगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?-अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है, तो इसका फायदा भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करनी होगी और तेल आयात के स्रोतों में विविधता लानी होगी। हालांकि होर्मुज के खुलने के बावजूद पूरी स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। बाजार फिलहाल सतर्क है और निवेशक आने वाले घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

इजरायल के लिए नई चुनौतियां-अमेरिका-ईरान बातचीत से क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। इजरायल के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा मानता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बातचीत से इजरायल पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इजरायल क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने और सुरक्षा हितों के लिए सक्रिय रणनीति अपनाने की कोशिश करेगा।

आगे क्या होगा?-होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से ऊर्जा बाजार को राहत मिली है, लेकिन संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब अमेरिका और ईरान के बीच अगली बातचीत पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर शांति बनी रही और अंतिम समझौता हुआ तो तेल बाजार में स्थिरता आएगी। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भी फायदा होगा। फिलहाल यह घटनाक्रम महंगाई पर लगाम लगाने की उम्मीद को मजबूत करता है।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button