
17 दिन से जारी भूख हड़ताल, सोनम वांगचुक की सेहत चिंता का विषय-जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। लगातार उपवास की वजह से उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ रही है और वजन भी करीब 8.5 किलो कम हो चुका है। इसके बावजूद उन्होंने साफ कह दिया है कि जब तक सरकार उनसे बातचीत के लिए आगे नहीं आएगी, तब तक वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। Cockroach Janta Party (CJP) ने उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि उनकी हालत नाजुक होती जा रही है। कई राजनीतिक नेता और सामाजिक संगठन भी उनकी सेहत को लेकर चिंतित हैं।
सरकार से बातचीत की मांग पर अड़े सोनम वांगचुक-CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्होंने खुद सोनम से मुलाकात कर भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की, लेकिन सोनम ने कहा कि अनशन खत्म करने की बजाय सरकार को जवाब देना चाहिए कि वह बातचीत क्यों नहीं कर रही। उनका कहना है कि आंदोलन का मकसद टकराव नहीं, बल्कि संवाद के जरिए समाधान निकालना है। जब तक सरकार बातचीत शुरू नहीं करती, उनका अनशन जारी रहेगा। यह साफ करता है कि सोनम पूरी तरह से अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे ने जताई चिंता-अभिजीत दिपके के अनुसार, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने फोन कर सोनम की तबीयत पूछी और उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई। उन्होंने CJP के आंदोलन और 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च का समर्थन किया। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी दिपके से बात कर सोनम की सेहत को लेकर चिंता जताई और उनसे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की। दोनों नेताओं ने संसद मार्च के लिए अपना समर्थन भी जाहिर किया है।
आंदोलन में शामिल अन्य कार्यकर्ताओं की भी हालत नाजुक-सोनम वांगचुक के अलावा कई अन्य कार्यकर्ता भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। AISA के कार्यकर्ता दीपक की तबीयत सोमवार को बिगड़ी, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन मंगलवार को उनकी हालत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने दिल की धड़कन में उतार-चढ़ाव पाया था, लेकिन जांच के बाद वे सुरक्षित पाए गए। वहीं नेहा, मनीष और आमीन अभी भी प्रदर्शन स्थल पर अनशन जारी रखे हुए हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मुआवजे की मांग पर अड़ा CJP- Cockroach Janta Party लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक की वजह से कई छात्रों को मानसिक तनाव झेलना पड़ा। संगठन ने उन परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की भी मांग की है, जिनके सदस्य परीक्षा विवादों के कारण आत्महत्या कर चुके हैं। CJP का कहना है कि जब तक सरकार इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाएगी, आंदोलन जारी रहेगा और इसे और मजबूत किया जाएगा।
20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारी जोरों पर-CJP अब अपने आंदोलन को बड़ा बनाने की तैयारी में है। पार्टी ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके लिए देशभर के समर्थकों से जुड़ने की अपील की गई है। संगठन ने मिस्ड कॉल अभियान भी शुरू किया है, जिससे लोग आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। CJP ने विरोध प्रदर्शन 20 जून से शुरू किया था, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।



