होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा मिसाइल हमला, UAE के दो तेल टैंकर हुए निशाने पर, एक भारतीय नाविक की मौत, 6 घायल

होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमला, दो UAE टैंकरों में लगी आग-मध्य पूर्व के तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बड़ा हमला हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। ये जहाज मोम्बासा और बहिया नाम के थे, जो होर्मुज के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे थे। मिसाइल लगने के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई, जिससे जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। यह घटना दिखाती है कि अब केवल ईरान के नजदीकी समुद्री रास्ते ही नहीं, बल्कि दक्षिणी मार्ग भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं, जिससे अन्य जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
एक भारतीय नाविक की मौत, छह भारतीय घायल-हमले में कुल आठ चालक दल के सदस्य घायल हुए हैं, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। यूएई रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, जान गंवाने वाला भारतीय नाविक मोम्बासा जहाज पर तैनात था। मृतक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। घायलों की हालत के बारे में भी विस्तृत जानकारी नहीं मिली है। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है। भारत सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
UAE ने हमले की कड़ी निंदा की, समुद्री सुरक्षा पर सवाल उठे-यूएई सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा है और पूरे क्षेत्र की शांति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। दक्षिणी समुद्री मार्ग को कई जहाज इसलिए चुनते हैं ताकि ईरानी तट के करीब वाले रास्ते से बचा जा सके, लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया कि अब ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाज भी सुरक्षित नहीं हैं।
ईरान का दावा और बढ़ता तनाव-ईरानी मीडिया ने पुष्टि की है कि दोनों टैंकरों को निशाना बनाया गया था, लेकिन यह नहीं बताया कि क्यों या कोई चेतावनी दी गई थी या नहीं। ईरान पहले भी कह चुका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर उसका नियंत्रण है और जहाजों को उसकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर ही इस रास्ते का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, यूएई और अन्य देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए सभी जहाजों को बिना बाधा आने-जाने का अधिकार बताया है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव, हमलों की बढ़ती संख्या-यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। जून में बनी अस्थायी सहमति टूटने के बाद हालात बिगड़ते गए। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है और होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के बदले माल की कीमत का 20 प्रतिशत शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा है, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता-इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जून में भी ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। उस वक्त भारत ने अमेरिका के सामने औपचारिक विरोध जताया था। दुनिया भर के कई व्यापारिक जहाजों पर भारतीय नाविक काम करते हैं, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार हमलों से उनकी सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है। अब सवाल है कि घायलों के इलाज, मृतक के पार्थिव शरीर की वापसी और भारत सरकार की अगली कार्रवाई क्या होगी।



