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बांग्लादेश की राजनीति में नया मोड़: संसद परिसर में होगा मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण

बांग्लादेश की राजनीति में इस वक्त खासा हलचल है। नई सरकार के गठन को लेकर कई अहम फैसले सामने आए हैं। राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन को लेकर जो बदलाव किया है, उसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम को।

संसद परिसर में होगा शपथ ग्रहण, बदली गई पुरानी परंपरा-बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन 17 फरवरी को बीएनपी प्रमुख तारीक रहमान के नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। यह समारोह अब तक की परंपरा से हटकर राष्ट्रपति भवन की जगह राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाज़ा में होगा। अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी है, जो इस बदलाव को खास बनाता है।

सांसदों को कौन दिलाएगा शपथ? संविधान के प्रावधानों पर नजर-स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट के शपथ ग्रहण के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नसीर उद्दीन नए निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला सकते हैं। आमतौर पर यह जिम्मेदारी स्पीकर की होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह भूमिका बदल सकती है। संविधान की तीसरी अनुसूची के तहत, स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में सीईसी यह काम कर सकते हैं।

स्पीकर का इस्तीफा और राजनीतिक स्थिति की जटिलता-स्थिति इसलिए पेचीदा हो गई है क्योंकि पूर्व संसद की स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल अज्ञात स्थान पर हैं। वहीं डिप्टी स्पीकर जेल में हैं। ऐसे में शपथ ग्रहण की संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति को उपयुक्त व्यक्ति चुनने का अधिकार है, जिसे संविधान भी मान्यता देता है।

पहले क्या कहा गया था, अब क्या बदला?-पहले कैबिनेट सचिव शेख अब्दुर राशिद ने कहा था कि शपथ समारोह राष्ट्रपति भवन में होगा, हालांकि तारीख की घोषणा नहीं की गई थी। उन्होंने कहा था कि जैसे ही निर्देश मिलेंगे, प्रशासन तैयार रहेगा। लेकिन अब स्थान बदलकर संसद परिसर करने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

प्रशासनिक बदलाव: नए कैबिनेट सचिव की नियुक्ति-इसी बीच, अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। कैबिनेट सचिव राशिद की संविदा नियुक्ति समाप्त कर दी गई है और उनकी जगह सिराज उद्दीन मिया को नया कैबिनेट सचिव बनाया गया है। राशिद ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले इस्तीफा दिया था, जिसे शनिवार को स्वीकार किया गया।

आगे क्या संकेत दे रहा है यह घटनाक्रम?-संविधान के मुताबिक, मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के बाद सांसदों को शपथ दिलाना जरूरी होता है। मौजूदा हालात में परंपरा से हटकर फैसले लिए जा रहे हैं, जो देश की राजनीति में एक अहम मोड़ की ओर इशारा करते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार किस दिशा में कदम बढ़ाती है।

यह बदलाव बांग्लादेश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत का संकेत हैं, जहां परंपराओं को तोड़कर नए रास्ते अपनाए जा रहे हैं। जनता की नजर अब इस नई सरकार के फैसलों और कार्यशैली पर टिकी है।

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