Google Analytics Meta Pixel
Entertainment

आशा भोसले और ओ.पी. नय्यर की अनकही कहानी: सुर, प्यार और दर्द का अधूरा रिश्ता

सुरों की वो अनकही कहानी: आशा भोसले और ओ.पी. नय्यर का रिश्ता-संगीत की दुनिया में कई रिश्ते होते हैं जो सिर्फ काम से बढ़कर होते हैं। ऐसा ही एक खास रिश्ता था आशा भोसले और ओ.पी. नय्यर का। यह सिर्फ गायक और संगीतकार का संबंध नहीं था, बल्कि एक ऐसी कहानी थी जिसमें संगीत के साथ प्यार, जुनून और दर्द भी जुड़ा था। उनके सुरों ने एक अलग पहचान बनाई।

ओ.पी. नय्यर ने दी आशा को नई उड़ान-1950 के दशक में जब लता मंगेशकर और गीता दत्त का बोलबाला था, तब ओ.पी. नय्यर ने अलग राह चुनी। उन्होंने लता जी के साथ काम करने से मना कर दिया और आशा भोसले की आवाज में जादू देखा। उन्होंने आशा को ऐसे गाने दिए जो उनकी पहचान बने और उन्हें स्टार बनाया।

एक अनाम रिश्ता जो बन गया मिसाल-ओ.पी. नय्यर और आशा भोसले ने 1958 से 1972 तक कई हिट गाने दिए जैसे ‘कजरा मोहब्बत वाला’, ‘ये रेशमी जुल्फों का अंधेरा’ और ‘आइए मेहरबान’। यह जोड़ी संगीत की दुनिया में अपनी अलग छाप छोड़ गई। उनके बीच का रिश्ता सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि गहरा और निजी भी था।

निजी जिंदगी में बढ़ती नजदीकियां और विवाद-ओ.पी. नय्यर शादीशुदा थे और चार बच्चे थे, वहीं आशा भोसले भी अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव से गुजर रही थीं। दोनों के बीच का रिश्ता धीरे-धीरे निजी हो गया, जो उस समय समाज में चर्चा और विवाद का विषय बना। यह रिश्ता संगीत से कहीं ज्यादा था।

1972 में टूटा ये रिश्ता-साल 1972 में आशा भोसले ने इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला लिया। अलग होने से पहले दोनों ने ‘चैन से हमको कभी आपने जीने ना दिया’ गाना रिकॉर्ड किया, जो उनके रिश्ते के दर्द को बयां करता था। यह गाना उनके टूटे रिश्ते की कहानी कहता है।

अवॉर्ड के साथ टूटा दिल-1974 में आशा भोसले को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, लेकिन उन्होंने इसे लेने नहीं गईं। ओ.पी. नय्यर ने उनकी तरफ से ट्रॉफी ली, जिसे बाद में उन्होंने गुस्से में कार की खिड़की से बाहर फेंक दिया। यह उनकी टूटे दिल की कहानी थी, जो संगीत से भी गहरा था।

सफलता के साथ आई दूरी-करीब 15 साल तक दोनों ने संगीत की दुनिया पर राज किया, लेकिन धीरे-धीरे उनके बीच दूरियां बढ़ने लगीं। ओ.पी. नय्यर पर पक्षपात के आरोप लगे कि वे ज्यादातर गाने आशा को देते थे। बावजूद इसके, उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं।

ओ.पी. नय्यर का सादगी भरा अंत-आशा से अलग होने के बाद ओ.पी. नय्यर की जिंदगी में बदलाव आया। उनके निजी रिश्ते कमजोर पड़े और परिवार से दूरी बढ़ी। उन्होंने अपने आखिरी दिनों में सादगी भरा जीवन बिताया। 28 जनवरी 2007 को 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

आज भी जिंदा है उनका संगीत और रिश्ता-यह कहानी सिर्फ दो कलाकारों की नहीं, बल्कि उस दौर की है जब संगीत, प्यार और दर्द एक-दूसरे में घुलमिल गए थे। आज दोनों हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाने और उनकी जोड़ी संगीत प्रेमियों के दिलों में आज भी जिंदा है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button