बारुईपुर कांड पर टीएमसी की रैली में बवाल, ममता बनर्जी ने बीजेपी और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

बारुईपुर घटना के विरोध में निकली टीएमसी रैली में हुआ हंगामा-पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। इस घटना के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की युवा इकाई ने विरोध मार्च निकाला, जिसे हाईकोर्ट से अनुमति भी मिली थी। लेकिन रैली के दौरान टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़पें हुईं। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को फिर से तनावपूर्ण बना दिया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि रैली को रोकने की कोशिश की गई, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ममता बनर्जी का आरोप, बीजेपी समर्थकों ने रैली को रोका-रैली के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद उनके समर्थकों ने विरोध मार्च को रोकने की कोशिश की और टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। ममता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए और रास्ते में मानव श्रृंखला बनाकर रैली को आगे बढ़ने से रोका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत ने अनुमति दी थी, तो इसे रोकने का अधिकार किसे मिला। ममता ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालना गंभीर मामला है।
पुलिस पर भी निशाना, कहा- अदालत के आदेश का पालन नहीं हुआ-ममता बनर्जी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पुलिस ने अदालत के आदेश को लागू करने में निष्क्रियता दिखाई। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना और लोगों की सुरक्षा करना है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। ममता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा नहीं दी और अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि अगर हाईकोर्ट ने रैली की अनुमति दी थी, तो प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि वह इसे शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराए।
‘मुझे नजरबंद जैसा महसूस कराया जा रहा है’, ममता का बड़ा दावा-ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें पुलिस की निगरानी में रखा जा रहा है और ऐसा माहौल बनाया गया है जैसे उन्हें घर में नजरबंद किया गया हो। उन्होंने बताया कि उनके आवास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ममता ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
बारुईपुर कांड के बाद बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव-बारुईपुर की घटना के बाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। बच्ची के साथ हुई कथित वारदात ने लोगों में गहरा आक्रोश पैदा किया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और अपने पक्ष को सही ठहरा रहे हैं। इस बीच राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। जनता की नजर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।



