महिला आरक्षण पर कांग्रेस घिरी, सीएम मोहन यादव का आरोप—नीति और नियत में फर्क साफ

महिला आरक्षण पर कांग्रेस पर कसा मोहन यादव का तंज: क्या है असल सच?-मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि कांग्रेस इस मामले में दोहरे रवैये पर चल रही है। जहां एक तरफ वह महिला आरक्षण की बात करती है, वहीं जब इसे लागू करने की बारी आती है, तो पीछे हट जाती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मोहन यादव ने क्या कहा और क्यों यह मुद्दा चर्चा में है।
कांग्रेस की दोहरी नीति पर सीएम का सवाल-सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि कांग्रेस की बात और काम में बड़ा फर्क है। वे कहते हैं कि कांग्रेस सिर्फ दिखावे के लिए महिला आरक्षण की बात करती है, लेकिन असल में उसे लागू करने से बचती है। इससे जनता के बीच कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठते हैं और पार्टी की सच्चाई सामने आती है।
संसद में समर्थन न देने पर उठाए सवाल-मोहन यादव ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण बिल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पार्टियों को मिलकर समर्थन देना चाहिए था। लेकिन विपक्ष हमेशा इसमें खामियां निकालने में लगा रहता है। उन्होंने कहा कि विरोध करना हो तो संसद के अंदर करना चाहिए, जनता के बीच भ्रम फैलाना सही नहीं।
जनता के बीच गलत संदेश जाने की चिंता-सीएम ने बताया कि इस तरह के विरोध से जनता के बीच गलतफहमी फैलती है। खासकर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि जो पार्टी उनके अधिकारों की बात करती है, वह उन्हें लागू करने में क्यों पीछे हटती है। उन्होंने कांग्रेस को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचने की सलाह दी।
तीन तलाक कानून पर भी कांग्रेस पर निशाना-मोहन यादव ने तीन तलाक कानून का जिक्र करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि तीन तलाक जैसी प्रथा को खत्म करने में कांग्रेस की भूमिका संदिग्ध रही है, जबकि भाजपा ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने का काम किया है।
भाजपा की महिलाओं के सशक्तिकरण में प्रतिबद्धता-सीएम ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार और पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। भाजपा जो भी फैसले लेती है, उसे जनता के सामने खुलकर रखती है और जमीन पर लागू भी करती है। यही वजह है कि लोगों का भरोसा भाजपा पर लगातार बढ़ रहा है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बताया ऐतिहासिक कदम-मोहन यादव ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया। उनका कहना है कि यह कानून महिलाओं को मजबूत बनाने के साथ-साथ देश के लोकतंत्र को भी नई दिशा देगा।
नए परिसीमन से लोकतंत्र होगा मजबूत-सीएम ने कहा कि अभी परिसीमन 1971 की जनगणना पर आधारित है, लेकिन आने वाले समय में नए परिसीमन से लोकतंत्र और मजबूत होगा। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में बेहतर अवसर मिलेंगे।
इस पूरी चर्चा से साफ होता है कि महिला आरक्षण और महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। मोहन यादव का आरोप है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है, जबकि भाजपा इसे लेकर प्रतिबद्धता दिखा रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी अहम हो जाएगा।



