होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले से बढ़ी वैश्विक चिंता, जहाजों को नई चेतावनी, UN ने रोका रेस्क्यू मिशन

होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले से बढ़ी दुनिया की चिंता, जहाजों को नई चेतावनी, UN ने भी रोका रेस्क्यू मिशन-दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ है। इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। ईरान की समुद्री अथॉरिटी ने जहाजों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा कारणों से फंसे नाविकों को निकालने वाले अपने रेस्क्यू मिशन को फिलहाल रोक दिया है। इस घटनाक्रम ने समुद्री सुरक्षा, वैश्विक तेल कारोबार और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ड्रोन हमले से कंटेनर जहाज को नुकसान, कंट्रोल रूम हुआ प्रभावित-अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ओमान के तट से करीब 14 किलोमीटर दूर एक कंटेनर जहाज को ड्रोन से निशाना बनाया गया। जहाज के दाहिने हिस्से से किसी अज्ञात वस्तु की टक्कर हुई, जिससे उसका कंट्रोल रूम यानी ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने बताया कि जहाज को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन किसी नाविक के घायल होने या जान गंवाने की खबर नहीं है। इस घटना ने समुद्री कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। फिलहाल जहाज की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जांच जारी है।
ईरान की नई चेतावनी से बढ़ी शिपिंग कंपनियों की चिंता-हमले के बाद पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने सोशल मीडिया पर जहाजों के लिए नई चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि जो जहाज तय समुद्री मार्ग और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ली जाएगी। PGSA को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा की निगरानी सौंपी गई है। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और कई देशों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा में अनिश्चितता से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव पड़ेगा।
UN ने फिलहाल रोका नाविकों का रेस्क्यू ऑपरेशन-घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी बड़ा फैसला लिया। महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए करीब 600 जहाजों और उनके चालक दल को निकालने का प्रस्तावित अभियान फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू मिशन तभी शुरू होगा जब राहत कार्य में शामिल जहाज पूरी तरह सुरक्षित होंगे। IMO ने यह भी बताया कि जिस कंटेनर जहाज पर हमला हुआ, वह UN के रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अमेरिका ने जताई चिंता, ट्रंप का सख्त रुख फिर आया सामने-व्हाइट हाउस ने कहा है कि उन्हें हमले की जानकारी है और जांच जारी है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी अस्थिरता को गंभीरता से लिया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा गया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं डालने देगा। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, इसलिए यहां तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है सीधा असर-होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस एशिया, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचती है। इसलिए यहां कोई भी संकट अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीदें थीं, लेकिन ड्रोन हमले और नई चेतावनी से शांति प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है। तनाव बढ़ा तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बीमा खर्च बढ़ेगा और व्यापार की लागत बढ़ेगी। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें इस मार्ग और अमेरिका-ईरान के कदमों पर टिकी रहेंगी।



