राज्यसभा में हंगामा, राहुल गांधी को बोलने न देने पर विपक्ष का वॉकआउट

राहुल गांधी का मुद्दा उठते ही राज्यसभा में गरमाया माहौल: जानिए पूरा विवाद-गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई, जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने का मुद्दा उठाया। इस पर सदन में नियमों को लेकर विवाद शुरू हो गया और विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर क्या हुआ और किन-किन बातों ने इस हंगामे को जन्म दिया।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मुद्दा उठा विपक्ष-मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने से रोकने की बात उठाई। उनका कहना था कि राहुल गांधी देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। इस मुद्दे पर सदन में नियमों को लेकर बहस शुरू हो गई और माहौल गरम हो गया।
अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने पर विवाद-खड़गे जब पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़ने लगे, तो उन्हें रोक दिया गया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उनका मानना था कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए रोक लगाई-सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने साफ कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस चाहती है तो लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस कर सकती है। इसके बाद शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कराई गई।
कांग्रेस सांसदों ने शून्यकाल में नारेबाजी की-शून्यकाल शुरू होते ही कांग्रेस सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कहा कि लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। बढ़ते शोर-शराबे के बीच सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को बोलने का मौका दिया, जिन्होंने विपक्ष की आलोचना की।
सरकार ने विपक्ष पर लगाए आरोप-किरण रिजिजू ने कहा कि सभी सांसद प्रधानमंत्री का भाषण सुनना चाहते हैं। अगर कांग्रेस नहीं सुनना चाहती तो यह उनका निजी फैसला है, लेकिन वे दूसरों को रोक नहीं सकते। उन्होंने बताया कि राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही अलग-अलग नियमों के तहत होती है।
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर कड़ी टिप्पणी की-नेता सदन जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया और खड़गे से कहा कि वे अपने नेता को समझाएं। उन्होंने कहा कि सदन को नियमों के अनुसार चलने देना चाहिए और बेवजह के मुद्दे नहीं लाने चाहिए।
खड़गे ने सरकार पर पलटवार किया-मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस सदन की कार्यवाही रोकना नहीं चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा पिछले चार दिनों से ठीक से नहीं चल पा रही क्योंकि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि संसद दो सदनों से मिलकर बनती है और दोनों लोकतंत्र के स्तंभ हैं।
लोकतंत्र पर सवाल और बहस जारी-खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष की आवाज दबा रही है। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी बोलना चाहते हैं तो सरकार को परेशानी होती है। हालांकि सभापति ने बार-बार कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर चर्चा नहीं हो सकती।
‘अबोध बालक’ टिप्पणी से बढ़ा विवाद-जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को “अबोध बालक” कह दिया, जिस पर खड़गे ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा निंदनीय है और भाजपा लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सभापति ने नेहरू का उदाहरण देकर समझाया-सभापति राधाकृष्णन ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का हवाला देते हुए कहा कि एक सदन की कार्यवाही दूसरे सदन में नहीं होनी चाहिए। इसी आधार पर कुछ टिप्पणियां हटा दी गईं। करीब 11:40 बजे विपक्ष के वॉकआउट के साथ यह हंगामेदार सत्र खत्म हुआ।



