“संविधान ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है” — गणतंत्र दिवस पर राहुल गांधी और खड़गे का बड़ा संदेश

संविधान: हर भारतीय की सबसे मजबूत आवाज़-लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा कि संविधान हर भारतीय का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की रक्षा करना ही भारत के गणराज्य की रक्षा करना है। उनका मानना है कि हमारा संविधान हमारी आवाज़ है और हमारे अधिकारों की सबसे मजबूत ढाल भी।
गणतंत्र की नींव और हमारी जिम्मेदारी-राहुल गांधी ने बताया कि हमारा गणराज्य इसी मजबूत संविधान की नींव पर टिका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान तभी और मजबूत होगा जब देश में समानता और आपसी सौहार्द बना रहेगा। संविधान की रक्षा सिर्फ कानून की बात नहीं, बल्कि देश के भविष्य को सुरक्षित रखने का संकल्प है।
कर्तव्य पथ पर श्रद्धांजलि और देशभक्ति-राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि देना है। उन्होंने “जय हिंद, जय संविधान” कहकर अपना संदेश पूरा किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे का संदेश: संविधान के मूल्यों की रक्षा-मल्लिकार्जुन खड़गे ने तिरंगा फहराते हुए कहा कि आज सबसे जरूरी है कि हम संविधान के सिद्धांतों और उसकी आत्मा की मजबूती से रक्षा करें। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे को हमारे संस्थापकों की अमूल्य विरासत बताया।
“हर कुर्बानी के लिए तैयार रहना होगा”-खड़गे ने कहा कि संविधान की सुरक्षा के लिए अगर बलिदान देना पड़े तो हमें तैयार रहना चाहिए। यह हमारे पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि इन मूल्यों को सिर्फ याद न रखें, बल्कि अपने जीवन में उतारें।
पहले भी जताई चिंता-गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर खड़गे ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध लोगों को संगठित प्रचार के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता को भी गंभीर समस्या बताया।
समाज में बढ़ती खाई पर चेतावनी-खड़गे ने कहा कि पिछले दशक में धार्मिक कट्टरता पर आधारित राजनीति ने देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया है। एससी, एसटी, महिलाएं, वंचित और अल्पसंख्यक वर्ग खुद को दूसरे दर्जे का नागरिक महसूस कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।



