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मराठी के सम्मान में एकजुट हुए उद्धव और राज ठाकरे: हिंदी थोपने के खिलाफ साझा आंदोलन की घोषणा

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मराठी भाषा: ठाकरे बंधुओं की ऐतिहासिक एकता!

एकता का नया अध्याय-राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मराठी भाषा की रक्षा के लिए एक साथ आ गए हैं! 5 जुलाई को, शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) हिंदी थोपे जाने और राज्य सरकार की नई तीन-भाषा नीति का विरोध करने के लिए एक संयुक्त प्रदर्शन करेंगे। ये मराठी अस्मिता के लिए एक बड़ा कदम है। दोनों नेताओं ने साफ़ किया है कि वो हिंदी थोपने या तीन-भाषा नीति को मानने वाले नहीं हैं। सरकार का प्रस्ताव कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाने का है, जिसका दोनों नेताओं ने पुरज़ोर विरोध किया है।

संयुक्त प्रदर्शन की तैयारी-पहले अलग-अलग दिन प्रदर्शन की योजना थी, लेकिन अब 5 जुलाई को दोनों पार्टियाँ साथ प्रदर्शन करेंगी। हालांकि, समय को लेकर अभी चर्चा जारी है, लेकिन एकता का संकल्प पक्का है। ये प्रदर्शन 1960 के संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की याद दिलाता है और मराठी गौरव की रक्षा का संकल्प दिखाता है। इस आंदोलन में सिर्फ़ शिवसेना और मनसे ही नहीं, बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों को भी शामिल होने का न्योता दिया जाएगा ताकि मराठी भाषा की रक्षा एकजुट होकर की जा सके।

नई शिक्षा नीति का विरोध-सरकार की नई शिक्षा नीति के मुताबिक, कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी तीसरी भाषा होगी। हालांकि, दूसरे भारतीय भाषाओं का विकल्प भी दिया जाएगा, लेकिन इस नीति से मराठी भाषा की अनदेखी का आरोप लग रहा है। इसके अलावा, कक्षा 1 और 2 में किताबों के बजाय मौखिक शिक्षा पर ज़ोर दिया जाएगा, जिससे मराठी भाषा को नुकसान पहुँचने की आशंका है।

क्या ये एकता कायम रहेगी?-ये एकता सिर्फ़ भाषा तक सीमित रहेगी या आगे भी दोनों नेता साथ काम करेंगे, ये तो वक़्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, मराठी अस्मिता के लिए उठाया गया ये कदम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छेड़ रहा है।

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