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क्या भारत फिर खरीदेगा ईरान का तेल?

 

अमेरिका की राहत के बाद ईरान ने भारत से बढ़ाया संपर्क, क्या फिर शुरू होगी कच्चे तेल की खरीद?-दुनिया के ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बदलाव की संभावना नजर आ रही है। अमेरिका द्वारा ईरानी तेल पर अस्थायी राहत देने के बाद ईरान ने भारतीय रिफाइनरियों और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों से संपर्क बढ़ा दिया है। इससे उम्मीद जगी है कि भारत जल्द ही ईरान से कच्चा तेल खरीदना फिर से शुरू कर सकता है। हालांकि अभी कई वित्तीय और व्यावसायिक चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञ इस कदम को काफी अहम मान रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक तेल बाजार के समीकरणों को बदल सकती है।

अमेरिकी राहत के बाद ईरान ने खरीदारों से बढ़ाया संपर्क-अमेरिका की 60 दिनों की अस्थायी छूट मिलने के बाद ईरान ने वैश्विक बाजार में अपनी तेल आपूर्ति फिर से मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी ने भारत समेत कई देशों के संभावित खरीदारों से बातचीत शुरू की है। कंपनी जानना चाहती है कि वे कितनी रुचि रखते हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाजार कई भू-राजनीतिक घटनाओं और आपूर्ति चुनौतियों से गुजर रहा है, इसलिए ईरान की वापसी बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती है।

60 दिनों की छूट ने खोला नया रास्ता-अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त तक ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति पर 60 दिनों की अस्थायी छूट दी है। यह छूट स्थायी नहीं है, लेकिन इससे ईरान को वैश्विक बाजार में वापसी का मौका मिला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस अवधि में यह तय होगा कि भारत और अन्य बड़े तेल आयातक देश ईरानी तेल खरीदने में कितना आगे बढ़ेंगे। यह समय काफी अहम माना जा रहा है।

भारतीय रिफाइनरियां कर रही हैं हर पहलू की जांच-ईरान से संपर्क के बाद भारतीय रिफाइनरियां स्थिति का गहराई से आकलन कर रही हैं। वे देख रही हैं कि तकनीकी और व्यावसायिक रूप से ईरानी कच्चा तेल खरीदना कितना फायदेमंद होगा। तेल की कीमत, भुगतान व्यवस्था, बीमा, जहाजों की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला जैसी कई बातें ध्यान में रखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल राजनीतिक अनुमति से काम नहीं चलेगा, बल्कि वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाओं का भी सही होना जरूरी है।

2019 के बाद बंद हो गई थी ईरानी तेल की खरीद-भारत और ईरान के बीच ऊर्जा व्यापार का लंबा इतिहास रहा है। लेकिन 2019 में अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरानी तेल की खरीद बंद कर दी थी। तब से भारत ने अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाया। हालांकि कुछ समय पहले मिली सीमित राहत के दौरान अप्रैल में भारतीय रिफाइनरियों ने करीब 5.3 लाख टन ईरानी तेल खरीदा था, लेकिन राहत खत्म होते ही आयात फिर बंद हो गया। अब नई छूट के साथ ऊर्जा व्यापार फिर से चर्चा में है।

भुगतान व्यवस्था अब भी सबसे बड़ी चुनौती-ईरानी तेल खरीदने में सबसे बड़ी दिक्कत भुगतान व्यवस्था की है। नई अमेरिकी छूट के तहत डॉलर में भुगतान की अनुमति मिली है, लेकिन व्यापक वित्तीय प्रतिबंध अभी भी जारी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में कई सावधानियां बनी हुई हैं, जो व्यापार को मुश्किल बना सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था पर नजर रहेगी। यदि भुगतान चैनल सुरक्षित और आसान बने तो ही बड़े पैमाने पर तेल खरीद संभव होगा।

कभी भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था ईरान-एक समय ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में था। 2016-17 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 12.6% थी। उस वक्त ईरान, सऊदी अरब और इराक के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर था। ईरानी तेल की गुणवत्ता और भुगतान सुविधाओं के कारण भारतीय कंपनियां इसे पसंद करती थीं। अब जब ईरान फिर सक्रिय हो रहा है, तो यह भारत के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है, हालांकि अंतिम फैसला व्यावसायिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

अब रिफाइनरियों के फैसले पर टिकी हैं निगाहें-सबसे अहम भूमिका अब भारतीय रिफाइनरियों की होगी। वे जल्दबाजी में फैसला नहीं कर रही हैं, बल्कि हर पहलू पर गहराई से विचार कर रही हैं। भुगतान, बीमा, परिवहन और अमेरिकी नीति की स्थिरता जैसे मुद्दों पर स्पष्टता के बाद ही बड़े आयात समझौते की संभावना बनेगी। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार फिर से बढ़ सकता है, नहीं तो यह मौका सीमित अवधि तक ही रह सकता है। फिलहाल अमेरिकी राहत ने बंद दरवाजा थोड़ा खोला है, अब देखना होगा भारत इसका कितना फायदा उठाता है।

 

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