नेपाल को पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री मिलीं: सुशीला कार्की ने संभाली कमान

नेपाल की राजनीति में नया सवेरा: सुशीला कार्की के हाथों में कमान!
पहली महिला पीएम, एक ऐतिहासिक पल!-नेपाल की राजनीति में एक ऐसा पल आया है जिसका गवाह शायद ही किसी ने सोचा हो। 73 साल की सुशीला कार्की ने देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने बाकायदा पदभार संभाला और आते ही जनता को साफ-साफ बता दिया कि उनकी सरकार सिर्फ मजे करने या कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं है, बल्कि देश में स्थिरता लाने और ज़रूरी सुधार करने के लिए है। कार्की ने खुद कहा है कि उनकी यह सरकार ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने ही चलेगी, और उसके बाद नई चुनी हुई संसद देश की बागडोर संभालेगी। यह वाकई एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
जनता के साथ, सुधार की ओर पहला कदम!-शपथ लेने के तुरंत बाद, यानी शुक्रवार देर रात शपथ लेने के बाद शनिवार को काम शुरू करते हुए, सुशीला कार्की ने कहा कि उनकी सरकार जनता के साथ मिलकर काम करना चाहती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर जनता का साथ नहीं मिला तो उनके सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। कार्की ने हाल ही में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच कराने का वादा किया है। साथ ही, उन्होंने भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने और अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। यह दिखाता है कि वे ज़मीनी हकीकत को समझती हैं।
युवाओं का जोश, जिसने बदल दी हवा!-यह सारा बदलाव तब हुआ जब नेपाल को ‘जनरेशन-ज़ेड’ यानी आज के युवा वर्ग के ज़बरदस्त आंदोलन का सामना करना पड़ा। 8 सितंबर को शुरू हुआ यह आंदोलन ’27 घंटे का आंदोलन’ कहलाया। इसमें ज्यादातर युवा थे जो देश में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे, सरकार से जवाबदेही मांग रहे थे और सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहे थे। देखते ही देखते यह आंदोलन इतना बड़ा हो गया कि काठमांडू समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। हालात इतने बिगड़ गए कि उस समय के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना पद छोड़ना पड़ा।
आंदोलन का असर, ओली का इस्तीफा और राहत की सांस!-आंदोलन कर रहे लोगों का गुस्सा इतना भड़क गया था कि उन्होंने ओली के दफ्तर तक धावा बोल दिया। इस दौरान 50 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल भी हुए। लगातार हो रही हिंसा और देश में मची अफरा-तफरी के बीच आखिरकार ओली को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। कुछ दिनों की उथल-पुथल के बाद अब काठमांडू की सड़कों पर धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य होता दिख रहा है। दुकानें खुल रही हैं, ट्रैफिक भी पहले जैसा होने लगा है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है।
चीन का समर्थन, दोस्ती का पैगाम!-जैसे ही सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने की खबर आई, चीन ने फौरन उन्हें बधाई दी। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल और चीन के रिश्ते हमेशा से बहुत मजबूत रहे हैं और दोनों देशों की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है। चीन ने यह भरोसा भी दिलाया है कि वे पंचशील के सिद्धांतों का पालन करते हुए नेपाल के साथ अपने सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं। इससे नेपाल की नई सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मज़बूत समर्थन मिलता हुआ दिख रहा है।
जनता की उम्मीदें, एक नई राह की शुरुआत!-सुशीला कार्की का अंतरिम प्रधानमंत्री बनना नेपाल की राजनीति के लिए एक नई उम्मीद की किरण की तरह है। आम लोग यही मान रहे हैं कि उनके नेतृत्व में देश में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और लोकतंत्र व स्थिरता का रास्ता और मज़बूत होगा। भले ही उनका कार्यकाल सिर्फ छह महीने का है, लेकिन उनसे उम्मीदें बहुत बड़ी हैं। जनता चाहती है कि वे देश को एक ऐसा मज़बूत ढांचा देकर जाएं, जिस पर भविष्य में एक दमदार और जवाबदेह सरकार का निर्माण हो सके। यह नियुक्ति महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी एक बड़ा प्रतीक है।



