पुतिन का अमेरिका पर हमला: भारत और चीन को रूसी ऊर्जा छोड़ने के लिए दबाव न डालें

पुतिन का पलटवार: अमेरिका को लग सकता है आर्थिक झटका-रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है और चेतावनी दी है कि भारत और चीन पर रूस के साथ ऊर्जा संबंध तोड़ने का दबाव डालने की कोशिशों का उल्टा असर हो सकता है। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका व्यापार में मनमानी करता है, तो इससे दुनिया भर में चीज़ें महंगी होंगी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। पुतिन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और चीन जैसे देश किसी के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
अमेरिका की चाल और वैश्विक कीमतें-पुतिन ने सोची में एक बड़ी बैठक में कहा कि अमेरिका भारत पर ज़्यादा टैक्स लगाने की बात कर रहा है, जिससे भारतीय सामानों पर 50% तक का टैक्स लग जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक बाज़ार में कीमतें बढ़ेंगी, क्योंकि अमेरिका इस तरह की नीतियाँ अपना रहा है। इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, क्योंकि फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊँची रखनी पड़ सकती हैं।
भारत और चीन: झुकेंगे नहीं!-पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि भारत और चीन किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अगर भारत हमारी ऊर्जा नहीं खरीदेगा, तो नुकसान तो होगा, लेकिन भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया कि वे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएंगे जिससे भारत को नुकसान हो। पुतिन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम खरीदता है, लेकिन दूसरों को रूसी ऊर्जा खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है।
रूस-भारत दोस्ती और अमेरिका की नाराज़गी-पुतिन ने अमेरिका की टैरिफ नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत और चीन जैसी पुरानी सभ्यताओं को धमकाया नहीं जा सकता। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब उपनिवेशवाद का ज़माना खत्म हो गया है और अमेरिका को बातचीत में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
भारत का कड़ा रुख और दुनिया का संतुलन-पुतिन ने साफ किया कि भारत अपने फायदे के लिए फैसले लेता रहेगा और किसी के दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दुनिया की अर्थव्यवस्था और रणनीति को संतुलित रखने में सक्षम हैं और उनके साथ सम्मान से बात करना ज़रूरी है। पुतिन के इस बयान से साफ है कि रूस भारत और चीन के साथ अपनी दोस्ती को मजबूत करना चाहता है और अमेरिका की दबाव की नीति का ज़्यादा असर नहीं होगा।



