“न्यायपालिका ही आखिरी उम्मीद है” — CJI सूर्यकांत के मंच से ममता बनर्जी की लोकतंत्र बचाने की भावुक अपील

जलपाईगुड़ी से ममता बनर्जी की न्यायपालिका को बड़ी अपील: लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करें-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जलपाईगुड़ी में सर्किट बेंच के उद्घाटन के दौरान न्यायपालिका से देश के लोकतंत्र और संविधान को “तबाही” से बचाने की जोरदार अपील की। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं ममता के इस बयान के पीछे की पूरी कहानी।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी अब न्यायपालिका पर-ममता बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य जजों से कहा कि आज संविधान, लोकतंत्र और देश के इतिहास की सबसे बड़ी जिम्मेदारी न्यायपालिका की है। उन्होंने मौजूदा हालात को “तबाही जैसा दौर” बताया और बताया कि जब बाकी संस्थाएं दबाव में हों, तब अदालतें ही जनता की आखिरी उम्मीद होती हैं।
केंद्रीय एजेंसियों पर लोगों की छवि खराब करने का आरोप-मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां जानबूझकर लोगों की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर निर्दोषों को फंसाया जा रहा है, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं। ममता ने न्यायपालिका से इस प्रवृत्ति पर कड़ी नजर रखने की मांग की।
I-PAC छापेमारी और ‘डेटा चोरी’ का विवाद-ममता का यह बयान हाल ही में हुई ईडी की छापेमारी के बाद आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के साल्ट लेक कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। ममता ने इसे 2026 के चुनाव से पहले पार्टी के गोपनीय दस्तावेज और उम्मीदवारों की सूची हथियाने की साजिश बताया।
प्रतीक जैन के घर पहुंचीं ममता बनर्जी-छापेमारी के बाद ममता खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और वहां से लैपटॉप और कुछ दस्तावेज ले गईं। इसके बाद ईडी ने उन पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। ममता ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
मीडिया ट्रायल पर कड़ा हमला-ममता ने ‘मीडिया ट्रायल’ की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी तीखा प्रहार किया। उनका कहना था कि आज अदालत का फैसला आने से पहले ही टीवी डिबेट और खबरों में लोगों को दोषी ठहरा दिया जाता है। यह चलन न केवल न्याय प्रक्रिया को कमजोर करता है, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी तोड़ता है।
एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप-मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियां निष्पक्ष काम करने के बजाय राजनीतिक एजेंडे के तहत काम कर रही हैं। उनका कहना था कि विरोधियों को दबाने और डराने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल हो रहा है, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है और देश के लिए खतरनाक है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और फंडिंग का मुद्दा-ममता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए फंडिंग रोक दी गई है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपने दम पर 88 फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए हैं और अब तक न्यायिक ढांचे पर 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं।
“राज्य अपने संसाधनों से अदालतें चलाएगा”-केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी में ममता ने कहा कि केंद्र चाहे सहयोग करे या न करे, उनकी सरकार न्याय व्यवस्था को मजबूत करने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने साफ कहा कि राज्य अपने संसाधनों से फास्ट-ट्रैक अदालतों का संचालन जारी रखेगा ताकि आम लोगों को समय पर न्याय मिल सके। ममता बनर्जी की यह अपील और आरोप पश्चिम बंगाल की राजनीति में न्यायपालिका और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हुए ममता ने साफ किया कि वे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगी। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।



