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आखिरी सफर में नम हुई आंखें: Asha Bhosle को हजारों लोगों ने दी भावभीनी विदाई

अंतिम विदाई: आशा भोंसले की फूलों से सजी अंतिम यात्रा, हर गली से गूंजा अलविदा आशा ताई-भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोंसले का अंतिम सफर भावुक माहौल में निकला। सफेद-पीले फूलों से सजी गाड़ी में उनकी पार्थिव देह को उनके घर से शिवाजी पार्क तक ले जाया गया। रास्ते में हजारों लोग उमड़े, हर कोई अपनी प्रिय ‘आशा ताई’ को आखिरी बार देखने और श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद था। इस लेख में हम इस भावुक यात्रा के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे।

फूलों से सजी अंतिम यात्रा, हर आंख में छलके आंसू-आशा भोंसले की अंतिम यात्रा में सफेद और पीले फूलों की सजावट ने माहौल को और भी भावुक बना दिया। उनके घर लोअर परेल से शुरू होकर शिवाजी पार्क तक यह यात्रा हजारों लोगों की मौजूदगी में हुई। हर कोई अपनी प्रिय गायिका को आखिरी बार देखने के लिए उमड़ा और फूल बरसाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान हर आंख नम थी और हर दिल में एक गहरा दुख था।

92 साल की उम्र में संगीत की दुनिया से विदाई-आशा भोंसले ने 92 वर्ष की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। डॉक्टरों के मुताबिक मल्टी-ऑर्गन फेल्योर उनकी मौत की वजह था। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमी और फिल्मी जगत के बड़े नामों ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख जताया। उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।

शिवाजी पार्क में होगी अंतिम संस्कार की रस्म-आशा भोंसले का अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में किया गया। उनकी पार्थिव देह को लोअर परेल से दादर तक करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय कराई गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सभी श्रद्धांजलि देने वाले व्यवस्थित तरीके से अपनी अंतिम विदाई दे सकें। यह यात्रा हर किसी के लिए एक भावुक अनुभव थी।

पुलिस बैंड की धुन ने बढ़ाई भावनाओं की गहराई-जब आशा भोंसले की पार्थिव देह वाहन में रखी गई, तब पुलिस बैंड ने धीमी और भावुक धुन बजाई। इस संगीत ने वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छू लिया। सड़क के दोनों ओर खड़े लोग चुपचाप इस दृश्य को देख रहे थे। माहौल में एक अजीब सी खामोशी थी, जो इस बात का एहसास करा रही थी कि देश ने एक अमूल्य आवाज खो दी है।

हर गली-मोहल्ले से उमड़ी श्रद्धांजलि देने वाली भीड़-अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते की हर गली, चॉल और इमारतों से लोग बाहर निकले। वे अपने घरों की बालकनी या सड़क किनारे खड़े होकर आशा ताई को एक आखिरी बार देखने की कोशिश कर रहे थे। जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ती, लोग फूल बरसाते और हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि देते। भारी पुलिस बंदोबस्त के बावजूद लोगों का प्यार और सम्मान हर जगह साफ नजर आ रहा था।

‘आशा ताई’ की पहचान और उनका संगीत योगदान-आशा भोंसले को प्यार से ‘आशा ताई’ कहा जाता था। उन्हें पद्म विभूषण और महाराष्ट्र भूषण जैसे बड़े सम्मान मिले। वे सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी कलाकार थीं जिन्होंने हर तरह के गानों को अपनी आवाज से खास बना दिया। उनका संगीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

अमर रहेंगे आशा भोंसले के गीत-आशा भोंसले ने अपने लंबे करियर में कई यादगार गाने दिए, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। “अभी ना जाओ छोड़ कर”, “इन आंखों की मस्ती”, “दिल चीज क्या है”, “पिया तू अब तो आजा”, “दुनिया में लोगों को” और “जरा सा झूम लूं मैं” जैसे गीत उनकी आवाज की जादूगरी को दर्शाते हैं। ये गाने आने वाली पीढ़ियों के दिलों में भी हमेशा बसे रहेंगे।

आशा भोंसले की अंतिम यात्रा ने न केवल उनके चाहने वालों को भावुक किया, बल्कि यह याद दिलाया कि उनकी आवाज़ और संगीत सदाबहार हैं। उनका जाना संगीत की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा और लोगों के दिलों में गूंजता रहेगा।

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