‘1000 करोड़ का फ्लाईओवर या खतरे का पुल?’ जबलपुर में गिरा कंक्रीट, उठे बड़े सवाल

जबलपुर का 1000 करोड़ का फ्लाईओवर: विकास की पहचान या खतरे का संकेत?-मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक बड़े प्रोजेक्ट ने शहर की तस्वीर बदलने का वादा किया था, लेकिन अब वही फ्लाईओवर सवालों के घेरे में आ गया है। महज आठ महीने के अंदर ही मदन महल इलाके में फ्लाईओवर से कंक्रीट गिरने की घटना ने लोगों के दिलों में डर पैदा कर दिया है। क्या यह विकास का प्रतीक है या सुरक्षा में बड़ी चूक?
शान से डर तक: फ्लाईओवर की कहानी-यह फ्लाईओवर पहले शहर की तरक्की का प्रतीक माना जाता था। कहा गया था कि इससे ट्रैफिक की समस्या कम होगी और लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन अब वही फ्लाईओवर लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अचानक ऊंचाई से कंक्रीट के टुकड़े गिरने लगे, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया। शुक्र है कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता-फ्लाईओवर से कंक्रीट गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इससे लोगों में डर और नाराजगी दोनों बढ़ गई। सवाल उठने लगे कि इतनी भारी रकम खर्च करके बनाए गए इस प्रोजेक्ट में इतनी लापरवाही कैसे हो सकती है? वीडियो के बाद संबंधित विभाग भी सक्रिय हो गया और मामले की सफाई देने लगा।
PWD का जवाब: गिरा हिस्सा मुख्य ढांचे का नहीं-लोक निर्माण विभाग ने कहा कि जो कंक्रीट गिरा है, वह फ्लाईओवर के मुख्य हिस्से का हिस्सा नहीं है। यह “स्लरी” यानी सीमेंट का अतिरिक्त घोल था, जो निर्माण के दौरान हटाया जाना चाहिए था। लेकिन ठेकेदार ने इसे ठीक से साफ नहीं किया, जिससे यह गिरा। विभाग ने इसे संरचनात्मक नुकसान नहीं माना है।
ठेकेदार की गलती और जांच के आदेश-PWD ने माना कि यह ठेकेदार की लापरवाही है। फिनिशिंग के वक्त अतिरिक्त स्लरी हटाना जरूरी था, जो नहीं किया गया। विभाग ने ठेकेदार को तुरंत सुधार का आदेश दिया है और पूरे फ्लाईओवर की जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक कोई बड़ा स्ट्रक्चरल नुकसान नहीं पाया गया है।
पहले भी उठे थे सवाल-यह पहली बार नहीं जब इस फ्लाईओवर की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। पिछले साल गर्मियों में जॉइंट्स के बीच बड़ा गैप देखा गया था। इसके अलावा, फ्लाईओवर के एक हिस्से में दरारें भी आई थीं। ये घटनाएं पहले से ही लोगों के मन में चिंता जगा चुकी थीं, जो अब और बढ़ गई है।
जनता के मन में डर और सवाल-अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट में इस तरह की लापरवाही स्वीकार्य है? अगर यह सिर्फ स्लरी थी, तो इसे पहले क्यों नहीं हटाया गया? क्या निगरानी में कोई बड़ी चूक हुई? फिलहाल सुधार के आदेश जरूर दिए गए हैं, लेकिन जबलपुर के लोग अब इस फ्लाईओवर के नीचे से गुजरते वक्त असहज महसूस कर रहे हैं।



