ट्रंप को बड़ा झटका: अमेरिकी कोर्ट ने रोकी नई टैरिफ नीति, भारत को मिली बड़ी राहत

ट्रंप की टैरिफ नीति पर बड़ा झटका: अमेरिकी कोर्ट ने रोका नया 10% टैरिफ, भारत समेत कई देशों को मिली राहत-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” ट्रेड नीति को एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 फीसदी के नए ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। इस फैसले से भारत सहित कई देशों को राहत मिली है, जो अपनी अर्थव्यवस्था के लिए एक्सपोर्ट पर निर्भर हैं।
ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को दूसरा बड़ा कानूनी झटका-ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को यह दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप सरकार के कई टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति के पास सीधे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। इसके बाद व्हाइट हाउस ने 1974 के ट्रेड एक्ट की सेक्शन 122 का सहारा लिया।
सेक्शन 122 क्या है और कैसे लगाया गया नया टैरिफ-सेक्शन 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ खास हालात में सीमित समय के लिए इंपोर्ट पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की अनुमति देता है। इसके तहत 150 दिनों तक 15 फीसदी तक का अस्थायी सरचार्ज लगाया जा सकता है। ट्रंप ने इसी प्रावधान के तहत फरवरी 2026 में लगभग सभी आयातित सामानों पर 10 फीसदी ड्यूटी लगाई थी।
कोर्ट ने टैरिफ को क्यों बताया गैरकानूनी?-तीन जजों की बेंच ने 2-1 के फैसले में कहा कि सिर्फ ट्रेड डेफिसिट होने से राष्ट्रपति को इतना व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं मिलता। कोर्ट ने इसे कांग्रेस की संवैधानिक शक्तियों की अवहेलना बताया और माना कि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बायपास करने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल टैरिफ के लागू होने पर रोक लगाई गई है।
भारत पर पहले भी अमेरिका का दबाव-ट्रंप प्रशासन ने पहले भी भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। 2025 में भारत के रूस से सस्ते तेल खरीदने पर दबाव बढ़ाया गया और कई भारतीय उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाकर 50 फीसदी कर दी गई थी। इससे फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल, ज्वेलरी और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर को नुकसान का खतरा था।
भारत ने नहीं झुका, मजबूत किया व्यापारिक रिश्ते-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने साफ कर दिया था कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। भारत ने अमेरिका के दबाव के बावजूद अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत किए और अमेरिकी कंपनियों की लॉबिंग ने कई टैरिफ योजनाओं को रोक दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बदली तस्वीर-फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति सीधे टैरिफ नहीं लगा सकते, केवल नियम बना सकते हैं। इस फैसले के बाद ट्रंप सरकार के अरबों डॉलर के टैरिफ अमान्य हो गए और कई मामलों में रिफंड प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद सेक्शन 122 के तहत नया टैरिफ लाया गया, जिस पर अब कोर्ट ने रोक लगा दी है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?-भारत अमेरिका को हर साल 80 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान एक्सपोर्ट करता है। अगर 10 फीसदी टैरिफ लागू होता, तो भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ती और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती। इससे फार्मा, टेक्सटाइल, मरीन प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग सेक्टर को खास नुकसान होता।
छोटे कारोबारियों और रोजगार को मिली राहत-इस फैसले से भारत के छोटे और मध्यम एक्सपोर्ट कारोबारों को राहत मिली है। इससे लाखों नौकरियों पर खतरा कम हुआ है। भारत का लक्ष्य 2030 तक मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है, इसलिए यह फैसला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
सिर्फ भारत ही नहीं, कई देशों को फायदा–यह फैसला चीन, यूरोपीय यूनियन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के लिए भी राहत लेकर आया है। लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के छोटे देशों के लिए भी यह अहम है। इससे यह संदेश गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले वैश्विक व्यापार नियम नहीं बदल सकते।
ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर सवाल-ट्रंप की आर्थिक राष्ट्रवाद नीति में टैरिफ मुख्य हथियार था। उनका मानना था कि ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग वापस आएगी और ट्रेड डेफिसिट कम होगा। लेकिन लगातार दो कोर्ट फैसलों ने इस रणनीति की कानूनी कमजोरियां उजागर कर दी हैं।
आगे ट्रंप प्रशासन क्या करेगा?-ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है और नए टैरिफ या कानून लाने की कोशिश कर सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी और कॉमर्स विभाग रिफंड प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं, जिसमें समय लग सकता है। भारत और अमेरिका के बीच सीमित व्यापार समझौते पर बातचीत भी जारी रहने की उम्मीद है।
वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए बड़ा संदेश-यह फैसला पूरी दुनिया के लिए संकेत है कि राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर अनिश्चितकाल तक टैरिफ नहीं बढ़ा सकते। भारत के कपड़ा, दवा और ज्वेलरी उद्योग को फिलहाल बड़े टैरिफ संकट से राहत मिली है। अमेरिकी ग्राहकों को भी महंगे सामान के बोझ से बचाया गया है।
ट्रंप प्रशासन अभी पीछे हटने को तैयार नहीं है, लेकिन अदालतों ने उनकी टैरिफ शक्तियों की सीमाएं तय कर दी हैं। आने वाले हफ्तों में देखना होगा कि वे अदालत के फैसले को स्वीकार करते हैं या नई रणनीति अपनाते हैं।



