I.N.D.I.A गठबंधन में बढ़ी दरार! कांग्रेस से नाराज़ DMK ने लोकसभा में अलग सीट की मांग की, अखिलेश के पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

I.N.D.I.A गठबंधन में दरार: DMK ने कांग्रेस से दूरी बनाई, लोकसभा में अलग सीट की मांग की-तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के बाद विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A में भी दरार नजर आने लगी है। M.K. Stalin की पार्टी DMK ने कांग्रेस से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिसका असर संसद तक पहुंच गया है। वहीं, अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विपक्षी खेमे में नई हलचल पैदा कर दी है।
लोकसभा में अलग बैठने की मांग से बढ़ी सियासी गर्माहट-DMK सांसद कनिमोझी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर कांग्रेस से अलग सीटिंग की मांग की है। उनका कहना है कि अब गठबंधन खत्म हो चुका है और अलग बैठने से सांसद बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभा पाएंगे। अभी तक DMK सांसद कांग्रेस के बगल में बैठते थे, लेकिन अब पार्टी इस व्यवस्था को बदलना चाहती है।
कांग्रेस पर ‘पीठ में छुरा घोंपने’ का आरोप-DMK नेताओं का गुस्सा इस बात पर है कि विधानसभा चुनाव में हार के 24 घंटे के भीतर कांग्रेस ने TVK का समर्थन कर दिया। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस ने मुश्किल वक्त में साथ छोड़कर भरोसा तोड़ा है। इससे DMK में कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है, जो I.N.D.I.A गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अखिलेश यादव के पोस्ट ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा-समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी और स्टालिन के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि वे मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। हालांकि उन्होंने सीधे कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे कांग्रेस पर तंज माना जा रहा है। कनिमोझी ने इस पोस्ट पर तुरंत जवाब देते हुए समर्थन जताया।
बंगाल से तमिलनाडु तक बदल रहे राजनीतिक समीकरण-अखिलेश यादव हाल ही में कोलकाता जाकर ममता बनर्जी से मिले थे और उनके समर्थन में खड़े नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी फिलहाल कांग्रेस से रिश्ते पूरी तरह खराब नहीं करना चाहती, क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनाव नजदीक हैं। राहुल गांधी ने भी बंगाल चुनाव में ममता के वोट चोरी के आरोपों का समर्थन किया था।
लेफ्ट पार्टियों और VCK ने भी बदला रुख-DMK को झटका तब लगा जब लेफ्ट पार्टियों CPI(M), CPI और VCK ने TVK का समर्थन कर दिया। शुरुआत में ये पार्टियां DMK गठबंधन छोड़ने को लेकर असमंजस में थीं, लेकिन जब स्टालिन ने AIADMK के साथ संभावित गठजोड़ की कोशिश की, तो इन पार्टियों ने अपना रुख बदल लिया। यह बदलाव तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
DMK को कुछ दलों से मिली राहत-जहां कई सहयोगी दल DMK से दूरी बना रहे हैं, वहीं Vijayakanth की DMDK और मुस्लिम लीग ने अभी तक DMK गठबंधन नहीं छोड़ा है। इससे स्टालिन को राजनीतिक सहारा मिला है। हालांकि लेफ्ट नेताओं को डर है कि AIADMK के करीब जाने से उनका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है।
संसद के मानसून सत्र में दिख सकता है असर-राजनीतिक जानकारों का कहना है कि I.N.D.I.A गठबंधन की दरार संसद के मानसून सत्र में भी दिखेगी। मोदी सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े बिल ला सकती है। विपक्ष की एकता पहले जैसी मजबूत नहीं रही, जिससे आगे तालमेल और मुश्किल हो सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में नया दौर-TVK के उभरने के बाद तमिलनाडु की राजनीति तेजी से बदल रही है। कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां और क्षेत्रीय दल नए समीकरण बना रहे हैं। DMK अपनी जमीन बचाने और पुराने सहयोगियों को साथ रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन भरोसे का संकट बढ़ता जा रहा है। आने वाले महीनों में सियासी खींचतान और तेज हो सकती है।
इस तरह, तमिलनाडु की राजनीति और I.N.D.I.A गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान ने विपक्षी दलों के बीच अस्थिरता बढ़ा दी है, जो आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है।



