जंगलों के 10 किमी दायरे में आरा मिलों पर रोक, हाईकोर्ट ने 19 याचिकाएं खारिज कीं

जंगलों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया-बिलासपुर हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर की दूरी तक आरा मिलें बंद रहेंगी। इस फैसले से जंगलों के आसपास के इलाके में पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने इस मामले में दायर 19 याचिकाओं को खारिज करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
सरकार की अधिसूचना को हाईकोर्ट ने माना सही-छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 सितंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर जंगलों के आसपास 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित किया था। हाईकोर्ट ने इस कदम को पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी और उचित माना। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला जंगलों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसे लागू किया जाना चाहिए।
वन विभाग ने प्रतिबंधित क्षेत्र में आरा मिलों को बंद कराया-सरकारी आदेश के बाद वन विभाग ने प्रतिबंधित क्षेत्र में चल रही सभी आरा मिलों को बंद करने के निर्देश दिए। साथ ही इन मिलों के लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक भी लगाई गई। इस कार्रवाई के खिलाफ कई आरा मिल संचालक हाईकोर्ट पहुंचे थे, लेकिन कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया और याचिकाएं खारिज कर दीं।
19 याचिकाएं खारिज, कोर्ट ने पर्यावरण को प्राथमिकता दी-आरा मिल संचालकों की 19 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सभी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने छत्तीसगढ़ को दिल्ली जैसी प्रदूषण की स्थिति से बचाने के लिए बफर जोन बनाने का फैसला सही बताया। यह फैसला राज्य के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।



