Politics

अजित पवार के अचानक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: अब आगे क्या?

अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: अब क्या होगा आगे?

बारामती हादसे ने हिला दी राजनीति की नींव- बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार के अचानक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा झटका दिया है। यह सिर्फ एक बड़े नेता का जाना नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा सवाल है कि अब आगे क्या होगा? जून-जुलाई 2023 में एनसीपी के दो गुटों में बंटवारे के बाद यह समय दोनों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण दौर बन चुका है।

शरद पवार पर सबकी नजरें टिकीं-राजनीतिक माहौल में अब सभी की निगाहें शरद पवार पर हैं। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बनाने वाले शरद पवार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे हटना चाहते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म हो रहा है, जिससे उनके संन्यास की चर्चा तेज हो गई है।

85वें जन्मदिन से पहले शरद पवार का बड़ा बयान-दिसंबर 2025 में अपने 85वें जन्मदिन से पहले बारामती में एक कार्यक्रम में शरद पवार ने साफ कहा था कि वे अब लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि वे 14 चुनाव लड़ चुके हैं और अब नई पीढ़ी को मौका देना चाहिए। यह बयान उनके राजनीतिक संन्यास की तरफ इशारा था।

‘भीष्म पितामह’ का राजनीति से धीरे-धीरे हटना-भारतीय राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले शरद पवार ने कहा था कि पहले 30 साल उन्होंने जिम्मेदारी संभाली, फिर अगले 25-30 साल अजित पवार ने मोर्चा संभाला। अब नई लीडरशिप के लिए व्यवस्था करनी होगी, लेकिन अजित पवार के अचानक निधन ने इस योजना को पूरी तरह बदल दिया है।

परिवार और पार्टी में फिर से बिखराव का खतरा-अजित पवार ऐसे समय में दुनिया से चले गए जब वे दोनों गुटों को एक करने की कोशिश कर रहे थे। परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, पिछले छह महीने से एकजुट होने के प्रयास चल रहे थे। कार्यकर्ता भी एकता चाहते थे, लेकिन यह हादसा परिवार और पार्टी दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बदला राजनीतिक समीकरण-2024 के लोकसभा चुनाव में एनसीपी (एसपी) ने 10 में से 8 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। लेकिन विधानसभा चुनावों में स्थिति उलट गई, जहां एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं और एनसीपी (एसपी) को केवल 10 सीटों पर संतोष करना पड़ा। यह बदलाव दोनों गुटों की ताकत का नया गणित दर्शाता है।

दोनों गुटों की मौजूदा लीडरशिप-एनसीपी (एसपी) में सुप्रिया सुले वर्किंग प्रेसिडेंट हैं, साथ में रोहित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल जैसे नेता हैं। वहीं एनसीपी में प्रफुल्ल पटेल वर्किंग प्रेसिडेंट और सुनील तटकरे प्रदेश अध्यक्ष हैं। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं, जो अब पार्टी के मोर्चे को संभालने की भूमिका में हैं।

पार्थ और जय पवार की राजनीति में वापसी की चर्चाएं-अजित पवार के बेटे पार्थ और जय फिलहाल सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। पार्थ 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। जय पवार के राजनीतिक डेब्यू की भी चर्चा पहले से थी। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि परिवार से किसी एक को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

सुनेत्रा पवार संभालेंगी पार्टी का मोर्चा- मौजूदा हालात में माना जा रहा है कि सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे मिलकरपार्टी के कामकाज को संभालेंगे। एनसीपी के पास छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दत्तात्रेय भरने, माणिकराव कोकाटे और धनंजय मुंडे जैसे अनुभवी नेता भी मौजूद हैं, जो पार्टी को मजबूत बनाएंगे।

एकता की कोशिशें जो अधूरी रह गईं-अजित पवार ने दोनों गुटों को करीब लाने की पहल शुरू कर दी थी। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव अलग-अलग लड़े गए, लेकिन जिला परिषद चुनाव ‘घड़ी’ चिन्ह पर साथ लड़ने का फैसला हुआ था। इसे पुनर्मिलन की पहली ठोस कोशिश माना जा रहा था, जो अब अधूरी रह गई।

नागपुर चिंतन शिविर और पार्टी का रोडमैप-19 सितंबर 2025 को नागपुर में हुए ‘राष्ट्रवादी चिंतन शिविर’ में एनसीपी ने ‘शिव-शाहू-फुले-आंबेडकर’ विचारधारा और ‘सर्व धर्म समभाव’ की प्रतिबद्धता दोहराई। भाजपा के साथ रिश्ते मजबूत करने और महाराष्ट्र के विकास पर जोर दिया गया। महाविकास आघाड़ी में वापसी की खबरों को पार्टी ने खारिज किया।

महा युति सरकार के सामने बड़ा सवाल-देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महा युति सरकार के लिए अब सबसे बड़ा सवाल है कि अजित पवार की जगह नया उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा। वित्त, योजना और आबकारी जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई मजबूत नेता जल्दी चाहिए, क्योंकि बजट सत्र नजदीक है और सरकार को तेज फैसले लेने वाले नेता की जरूरत है।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button