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Politics

15 साल बाद बंगाल में सत्ता परिवर्तन, TMC पर मंडराया सबसे बड़ा संकट

15 साल की सत्ता गई, अब TMC के सामने सबसे बड़ा संकट: बंगाल में बीजेपी सरकार के बाद ममता की पार्टी में बढ़ी बेचैनी-पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल गई है। जैसे ही ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण हुआ, टीएमसी के कई दफ्तरों में सन्नाटा छा गया। ममता बनर्जी की मजबूत राजनीतिक मशीनरी अचानक कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

चुनाव हारते ही टीएमसी में खुली अंदरूनी नाराजगी-चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। जो नेता पहले पार्टी का समर्थन करते थे, अब अलग-अलग बयान दे रहे हैं। वरिष्ठ नेता असीत मजूमदार ने घमंड और सुस्ती के आरोप लगाए, जबकि सांसद कल्याण बनर्जी ने चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए और पार्टी में साजिश की बात कही।

ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द घूमती रही पूरी पार्टी-टीएमसी का पूरा ढांचा लंबे समय तक ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उम्मीदवारों के चयन से लेकर संगठन की रणनीति तक सब कुछ केंद्रीकृत था। 2011 में इस मॉडल ने वाम मोर्चा को सत्ता से बाहर किया, लेकिन अब सत्ता जाने के बाद यह सिस्टम कमजोर पड़ता दिख रहा है।

पंचायत और नगर निकायों में टूट का खतरा-टीएमसी नेताओं को डर है कि आने वाले महीनों में पंचायतों और नगर निकायों में टूटफूट हो सकती है। पहले टीएमसी ने दूसरी पार्टियों के नेताओं को जोड़कर स्थानीय निकायों में पकड़ बनाई थी, लेकिन अब वही रणनीति उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है। इतिहास दोहराने का खतरा मंडरा रहा है।

हार के बाद अभिषेक बनर्जी पर उठे सवाल-टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी अब पार्टी के अंदर सवालों के घेरे में हैं। उनकी रणनीति, उम्मीदवारों के बार-बार बदलाव और सलाहकार कंपनियों पर अधिक भरोसे ने स्थानीय समीकरण बिगाड़े। इससे पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी और संगठन कमजोर हुआ।

क्या ममता बनर्जी कर पाएंगी वापसी?-राजनीतिक विशेषज्ञ ममता को पूरी तरह खत्म नहीं मानते। 2004 और 2006 की हार के बाद उन्होंने सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन के जरिए 2011 में जोरदार वापसी की थी। लेकिन इस बार पार्टी पर भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले और अंदरूनी गुटबाजी के आरोप हैं। बीजेपी भी पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

विपक्षी एकता की अपील से बढ़ी राजनीतिक चर्चा-ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने वाम दलों समेत अन्य पार्टियों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ने का संकेत दिया। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि ममता ने पहले वाम दलों को सत्ता से बाहर किया था। अब देखना होगा टीएमसी खुद को कैसे संभालती है।

बंगाल की राजनीति में अब नए सिरे से बदलाव की संभावना है। टीएमसी के लिए यह वक्त सिर्फ सत्ता में लौटने का नहीं, बल्कि अपने संगठन को बचाने का भी है। आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की राजनीतिक वापसी पर सबकी नजरें टिकी होंगी।

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