“ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है”: ट्रंप की जिद पर भड़का जनसैलाब, नूक की सड़कों पर आज़ादी की हुंकार

ट्रंप की जिद से भड़का ग्रीनलैंड: सड़कों पर उतरे हजारों लोग, ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं’ का नारा-डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश अब सिर्फ बयानबाजी नहीं रही, बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद बन गई है। शनिवार को राजधानी नूक की सड़कों पर हजारों लोग “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है” के नारे लगाते हुए अपने देश की जमीन और पहचान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए।
नूक में ठंड के बावजूद उमड़ा जनसैलाब-कड़ाके की ठंड के बीच भी नूक शहर की करीब एक-चौथाई आबादी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च करने निकली। युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी हाथों में झंडे और पोस्टर लेकर विरोध जताने पहुंचे। 9 साल की बच्ची अलास्का का पोस्टर ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं’ लोगों की भावनाओं का प्रतीक बन गया।
यूरोप पर टैरिफ की धमकी, दबाव की नई रणनीति-ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए आर्थिक दबाव का सहारा लिया है। उन्होंने कहा है कि जो 8 यूरोपीय देश इस कदम का विरोध कर रहे हैं, उन पर फरवरी 2026 से 10% आयात शुल्क लगाया जाएगा। इसे कूटनीतिक दबाव और खुली धमकी माना जा रहा है।
85% जनता विरोध में, फिर भी ट्रंप अड़े-ट्रंप का कहना है कि खनिजों से भरपूर ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है। वेनेजुएला के बाद इस मुद्दे पर उनकी भाषा और भी सख्त हो गई है। लेकिन सर्वे बताते हैं कि करीब 85% लोग अमेरिका में शामिल होने के खिलाफ हैं, जबकि केवल 6% ही समर्थन करते हैं।
प्रधानमंत्री खुद सड़क पर, विरोध फैलता दुनिया भर में-ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन खुद प्रदर्शन में शामिल हुए। विरोध केवल नूक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोपेनहेगन और कनाडा के नुनावुत में भी रैलियां हुईं। लोग कहते हैं कि अमेरिका दोस्ती का दावा करता है, लेकिन अब दबाव की भाषा बोल रहा है।
यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, पहचान और आज़ादी की है-स्थानीय नेताओं ने इस आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आज़ादी और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई बताया है। प्रदर्शनकारियों का साफ संदेश है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। ग्रीनलैंड की सड़कों से उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश ने वहां के लोगों में गहरा विरोध पैदा कर दिया है। यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि पहचान, आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा का है। ग्रीनलैंड की जनता ने साफ कर दिया है कि वे अपनी संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।



