छत्तीसगढ़ में फंसी मलयाली ननों को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस-सीपीएम आमने-सामने

छत्तीसगढ़ में फंसी मलयाली ननों की रिहाई: राजनीतिक खेल या मानवीय संकट?-छत्तीसगढ़ में फंसी दो मलयाली ननों की रिहाई का मामला अब राजनीतिक रस्साकशी में बदल गया है। हर पार्टी अपनी-अपनी भूमिका का श्रेय लेने में लगी है, जिससे ननों की सुरक्षित वापसी में देरी हो रही है। क्या ये सिर्फ़ राजनीति है या फिर कुछ और भी है?
कांग्रेस बनाम CPM: श्रेय की होड़-कांग्रेस और CPM, दोनों ही I.N.D.I.A गठबंधन के सदस्य हैं, लेकिन इस मामले में दोनों के बीच खटास साफ़ दिख रही है। CPM का आरोप है कि कांग्रेस सिर्फ़ अपनी पीठ थपथपाने में लगी है, न कि ननों की वास्तविक मदद करने में। CPM नेता पी.के. श्रीमती ने कांग्रेस पर सीधा आरोप लगाया है कि वे इस मामले में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बनाने के सुझाव को भी कांग्रेस ने ठुकरा दिया, जिससे दोनों दलों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
बीजेपी का पलटवार: झूठे आरोपों का खेल?-बीजेपी ने भी इस मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बिशपों से मुलाकात कर ननों की रिहाई के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे भ्रामक सूचनाएं फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। बीजेपी का दावा है कि उनकी प्राथमिकता ननों की सुरक्षित वापसी है, न कि राजनीतिक फायदा उठाना। लेकिन क्या वाकई यही सच है?
क्या है असली मुद्दा?-इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा अहम सवाल ये है कि आखिर ननों की रिहाई में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या ये सिर्फ़ राजनीतिक दलों की आपसी लड़ाई है या फिर कुछ और भी गंभीर कारण है? ननों की सुरक्षा और जल्द से जल्द रिहाई सुनिश्चित करना सबसे ज़रूरी है, इससे ज़्यादा कुछ भी नहीं। यह राजनीतिक फायदे की लड़ाई नहीं, बल्कि मानवीयता का सवाल है।



