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डेनमार्क में सेना में बड़ा बदलाव: अब महिलाओं की भी होगी अनिवार्य भर्ती, युद्ध की आशंका ने बदली सोच

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डेनमार्क में महिलाओं के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा: एक नया अध्याय-डेनमार्क ने एक बड़ा फैसला लिया है जिससे देश भर में चर्चा छिड़ गई है। 2025 से, सभी 18 साल की लड़कियों को अब पुरुषों की तरह ही सेना में अनिवार्य सेवा देनी होगी। यह फैसला सिर्फ़ सेना की ताकत बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि समानता को मज़बूत करने के लिए भी लिया गया है।

 रूस-यूक्रेन युद्ध का असर-यूक्रेन पर रूस के हमले ने यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इसलिए, डेनमार्क अपनी रक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने पर ज़ोर दे रहा है। महिलाओं को अनिवार्य सेवा में शामिल करना इसी कड़ी का एक हिस्सा है। यह फैसला पहले 2027 में लागू होने वाला था, लेकिन हालात को देखते हुए इसे जल्दी लागू करने का निर्णय लिया गया है।

नई ट्रेनिंग और लंबी अवधि-

अब अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि 4 महीने से बढ़ाकर 11 महीने कर दी गई है। पहले 5 महीने बेसिक ट्रेनिंग होगी, और बाकी 6 महीने ऑपरेशनल सर्विस में बिताए जाएँगे। इससे युवाओं को बेहतर सैन्य शिक्षा मिलेगी और वे मुश्किल हालातों का सामना करने के लिए बेहतर तैयार होंगे।

 महिलाओं की प्रतिक्रिया: उम्मीद और चिंता-कुछ महिलाएँ इस फैसले से उत्साहित हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह समानता का एक कदम है और वे भी देश की रक्षा में अपना योगदान दे सकती हैं। लेकिन कुछ महिलाओं को भी चिंता है, क्योंकि यह उनके लिए एक नया और अनजान अनुभव होगा। हालांकि, कई महिलाओं को उम्मीद है कि यह अनुभव उन्हें आत्मविश्वास और नई क्षमताओं से भर देगा।

 चुनौतियाँ और तैयारी-अधिक सैनिकों को प्रशिक्षित करने और रखने के लिए डेनमार्क को कई चुनौतियों का सामना करना होगा। नए बैरक बनाने होंगे, और ज़्यादा उपकरणों की ज़रूरत होगी। साथ ही, सेना में यौन उत्पीड़न जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी कड़े कदम उठाने होंगे।

 स्कैंडिनेवियाई देशों में एक ट्रेंड-डेनमार्क अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने यह कदम उठाया है। नॉर्वे और स्वीडन जैसे पड़ोसी देशों में भी पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा है। यह दिखाता है कि यूरोप में बढ़ते खतरों के बीच, देश अपनी सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं।

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