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नेपाल को पहली महिला प्रधानमंत्री: सुशीला कार्की ने संभाली कमान, संसद भंग और नए चुनाव का ऐलान

नेपाल में नया सवेरा: सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री, देश में जश्न का माहौल!-नेपाल की राजनीति में इन दिनों हलचल मची हुई है। शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने एक बड़ा फैसला लेते हुए संसद को भंग कर दिया है। यह फैसला किसी और की नहीं, बल्कि अभी-अभी नियुक्त हुई प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सलाह पर लिया गया है। रात 11 बजे से ही संसद भंग होने की सूचना जारी कर दी गई है, और इसके साथ ही यह भी ऐलान हुआ है कि अब अगले संसदीय चुनाव 21 मार्च 2026 को होंगे। यह सब तब हो रहा है जब देश में सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी को लेकर ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन और थोड़ी अशांति का माहौल था। अब सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया है, और यह वाकई एक ऐतिहासिक पल है क्योंकि वह नेपाल के इतिहास में पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं।

 एक ऐतिहासिक क्षण: नेपाल को मिली पहली महिला पीएम!-शुक्रवार की रात, नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 73 साल की कार्की ने राष्ट्रपति के सामने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह नियुक्ति उस वक्त हुई है जब सिर्फ तीन दिन पहले ही के. पी. शर्मा ओली को देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते दबाव के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा था। खास तौर पर, सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी के खिलाफ युवाओं ने जिस तरह सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाई, उसने पूरी नेपाली राजनीति को ही एक नया मोड़ दे दिया। शपथ ग्रहण समारोह में देश के चीफ जस्टिस, सेना के प्रमुख, कई बड़े सरकारी अधिकारी और विदेशी मेहमान भी मौजूद थे। एक दिलचस्प बात यह भी रही कि पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ही एकमात्र ऐसे पूर्व प्रधानमंत्री थे जो इस खास मौके पर पहुंचे। राष्ट्रपति पौडेल ने कार्की को बधाई देते हुए कहा, “आपको बहुत-बहुत बधाई, मुझे यकीन है आप देश को सही राह पर ले जाने में कामयाब होंगी।”

युवाओं का जोश और सोशल मीडिया पर खुशी की लहर-जैसे ही सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने की खबर फैली, काठमांडू की सड़कों पर, खासकर राष्ट्रपति भवन के पास, युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा और उन्होंने जमकर जश्न मनाया। यह वही युवा पीढ़ी है, जिसे ‘जनरेशन Z’ कहा जाता है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी के खिलाफ आवाज़ उठाकर ओली सरकार को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर तो बधाई संदेशों की जैसे बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा, “यह हमारे लिए गर्व का दिन है, देश को पहली महिला प्रधानमंत्री मिली है!” वहीं एक युवा लड़की ने कहा, “जैसे एक मां घर और कॉलेज को बखूबी संभालती है, वैसे ही अब वो देश को भी संभालेगी।” इस तरह का माहौल देखकर लगता है कि युवाओं में एक नई उम्मीद जगी है। लोगों को विश्वास है कि एक महिला के नेतृत्व में देश में स्थिरता आएगी और विकास की गति तेज होगी।

सर्वसम्मति से चुनी गईं सुशीला कार्की: क्यों बनीं सबकी पसंद?-राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नियुक्त करने से पहले देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, सेना के आला अधिकारियों, कानून के जानकारों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों से खुलकर बातचीत की। काफी विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया कि देश को इस अस्थिरता के दौर से निकालने के लिए एक ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जो निष्पक्ष हो और जिस पर सब भरोसा कर सकें। इसी सोच के साथ पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की पर सबकी सहमति बनी। कानून और न्यायपालिका के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव, उनकी बेदाग छवि और उनकी ईमानदारी उन्हें इस अहम पद के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। आंदोलन कर रहे युवाओं ने भी कार्की के नाम पर अपना भरोसा जताया, और इसी वजह से राष्ट्रपति ने उन्हें अंतरिम सरकार की कमान सौंपी। अब सुशीला कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे देश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखें और 2026 में होने वाले चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराएं।

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