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ट्रंप की शांति योजना: क्या गाज़ा में रुकेंगी बमबारी और लौटेंगे बंधक?

 ट्रंप का बड़ा दांव: क्या गाज़ा में रुक जाएगी बमबारी?-पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है, जिसने गाज़ा में जारी संघर्ष को लेकर हलचल मचा दी है। उन्होंने इज़राइल से गाज़ा पट्टी पर तुरंत बमबारी रोकने का आग्रह किया है। लेकिन, ऐसा क्यों? और क्या है इस पूरे मामले का सच? आइए, विस्तार से जानते हैं।

 शांति की उम्मीद: ट्रंप की योजना और हमास का जवाब-ट्रंप का यह कदम तब आया है जब हमास ने उनकी शांति योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने की बात कही है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है कि हमास सभी बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुझे विश्वास है कि अब स्थायी शांति का समय आ गया है। इज़राइल को बमबारी रोकनी चाहिए ताकि बंधकों को सुरक्षित निकाला जा सके।”यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गाज़ा में पिछले लगभग दो साल से युद्ध की स्थिति बनी हुई है। 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले के बाद से ही इज़राइल और हमास के बीच टकराव जारी है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर यह समझौता नहीं हुआ, तो हमास पर पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हमला किया जाएगा।

 हमास का रुख: समझौते की राह?-हमास ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वे ट्रंप की योजना के कुछ पहलुओं से सहमत हैं, जैसे कि सत्ता छोड़ना और सभी बंधकों को रिहा करना। हालांकि, योजना के अन्य पहलुओं पर फिलिस्तीनी गुटों के बीच सहमति की आवश्यकता है।हमास ने कहा कि वे बंधकों को “फॉर्मूले” के अनुसार छोड़ने को तैयार हैं, जिसके बदले में सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने सत्ता को एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी संगठन को सौंपने की इच्छा भी जताई है। लेकिन, हमास ने यह भी स्पष्ट किया है कि गाज़ा के भविष्य और फिलिस्तीनी अधिकारों पर फैसला सभी फिलिस्तीनियों की सहमति और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर होना चाहिए।

 ट्रंप की योजना: क्या है खास? ट्रंप की योजना में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं:

* बंधकों की रिहाई: तुरंत सभी 48 बंधकों को रिहा किया जाएगा, जिनमें से लगभग 20 जीवित हैं।
* सैन्य कार्रवाई पर रोक: इज़राइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।
* कैदियों की रिहाई: बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा जाएगा।
* पुनर्निर्माण: मानवीय सहायता के साथ गाज़ा के पुनर्निर्माण का मार्ग खुलेगा।

इस योजना में गाज़ा को अंतरराष्ट्रीय प्रशासन के अधीन रखने का प्रस्ताव है, जिसकी निगरानी खुद ट्रंप और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर करेंगे। हालांकि, इसमें वेस्ट बैंक और गाज़ा को मिलाकर भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनाने का कोई जिक्र नहीं है, जिस कारण कई फिलिस्तीनी इसे इज़राइल समर्थक योजना मान रहे हैं।

 चुनौतियाँ और आपत्तियाँ-हमास के नेताओं ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियाँ भी जताई हैं। उन्होंने कहा है कि यह प्रस्ताव बिना बातचीत के लागू नहीं हो सकता। वरिष्ठ नेता मूसा अबू मरजूक ने कहा कि सभी बंधकों को 72 घंटे में छोड़ना मुश्किल है, क्योंकि कई की पहचान और स्थिति पता करने में समय लगेगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि गाज़ा में विदेशी ताकतों का प्रवेश पूरी तरह अस्वीकार्य होगा।हमास ने यह भी कहा कि वे हथियार भविष्य की किसी स्वतंत्र फिलिस्तीनी सरकार को सौंप सकते हैं, लेकिन फिलहाल इस योजना में इसका उल्लेख नहीं किया गया है।

 गाज़ा की जमीनी हकीकत: विनाश का मंजर-इज़राइल की कार्रवाई ने गाज़ा की स्थिति को बेहद खराब कर दिया है। शहर के बड़े हिस्से मलबे में तब्दील हो चुके हैं। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, और लगभग 90 प्रतिशत आबादी कई बार विस्थापित हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाज़ा में भुखमरी की स्थिति बन चुकी है। शरण लेने वाले लोग अस्पतालों के बाहर तक रहने को मजबूर हैं।गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि अब तक 66,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। हालांकि, यह मंत्रालय हमास के अधीन है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और स्वतंत्र विशेषज्ञ इसके आंकड़ों को सबसे विश्वसनीय मानते हैं।

आगे की राह: उम्मीदें और चुनौतियाँ-7 अक्टूबर 2023 के हमले की दूसरी बरसी नजदीक है। उस दिन हमास ने इज़राइल में घुसकर 1,200 लोगों की हत्या की थी और 251 लोगों को अगवा किया था। आज भी दर्जनों बंधक बचे हैं, जिनका इस्तेमाल हमास अपनी सबसे बड़ी सौदेबाजी की ताकत के रूप में कर रहा है।ट्रंप की कोशिश है कि बरसी से पहले यह युद्ध खत्म हो और बंधक घर लौटें। हालांकि, इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है कि हमास को पूरी तरह हार माननी होगी और हथियार डालने होंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह शांति योजना कितनी दूर तक जा पाती है।

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