सियासत में ऐतिहासिक पल: सेना भवन में साथ पहुंचे उद्धव–राज ठाकरे, महाराष्ट्र की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत

सेना भवन में साथ-साथ: महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ और उम्मीदें- उद्धव और राज ठाकरे का ऐतिहासिक मिलन
रविवार दोपहर महाराष्ट्र की राजनीति में एक खास पल आया जब ठाकरे परिवार के चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ दादर के शिवसेना भवन पहुंचे। यह मुलाकात सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी थी, जिसने दो दशक पुरानी दूरी को खत्म किया। इस कदम को आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है।
बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती पर गठबंधन की मुहर-2026 की शुरुआत में, शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती और पार्टी के 60वें स्थापना वर्ष पर, उद्धव और राज ने गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने बीजेपी पर कड़ी आलोचना की और बताया कि यह गठबंधन केवल चुनावी मजबूरी नहीं, बल्कि विचारों और विरासत की साझेदारी है।
छह महीने की बातचीत से बढ़ी नजदीकियां-पिछले छह महीनों में उद्धव और राज ठाकरे के बीच कई बार मुलाकातें हुईं, जिनमें परिवार और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। राज ने मातोश्री का दौरा किया, वहीं उद्धव ने शिवतीर्थ जाकर राज से मुलाकात की। इन बैठकों ने पुरानी दूरियों को कम कर रिश्तों में गर्मजोशी लौटाई और राजनीतिक एकता की नींव मजबूत की।
सेना भवन की दहलीज पर यादें और राजनीति-सेना भवन में दोनों नेताओं का साथ आना खास था क्योंकि यह जगह बालासाहेब ठाकरे की राजनीति से जुड़ी है। इस मौके पर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत भी मौजूद थे। यह दृश्य न केवल राजनीतिक था, बल्कि बालासाहेब की विचारधारा को फिर से जीवंत करने वाला भी माना गया।
बीएमसी चुनाव और संयुक्त घोषणापत्र की अहमियत-उद्धव, राज और शरद पवार की एनसीपी ने बीएमसी चुनाव से पहले संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। कभी अविभाजित शिवसेना ने 25 साल तक बीएमसी पर शासन किया था। इस चुनाव में जीत गठबंधन के भविष्य और राजनीतिक अस्तित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो इस एकता की पहली बड़ी परीक्षा होगी।
बीजेपी और मोदी पर तीखे आरोप-प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे आरोप लगाए। उद्धव ने बीजेपी की ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की राजनीति को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और वोट चोरी जैसे मुद्दे पर चिंता जताई।
राज ठाकरे की कड़ी चेतावनी और सवाल-राज ठाकरे ने बीजेपी को चेतावनी दी कि सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती। उन्होंने कहा कि सत्ता जाने पर हिसाब भी देना पड़ता है। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। राज ने सवाल उठाया कि बीजेपी दूसरे राज्यों में निर्विरोध उम्मीदवारों पर सवाल उठाती है, लेकिन महाराष्ट्र में चुप क्यों है।
महाराष्ट्र की राजनीति और भविष्य की दिशा-राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा देश को दिशा दिखाने वाला राज्य रहा है, लेकिन अब इसे यूपी-बिहार जैसा बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और जो खुद को अजेय समझते हैं, उन्हें फिर से सोचने की जरूरत है। उद्धव और राज का यह साझा मंच महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।



