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International

Hormuz Crisis: 366 विदेशी जहाजों पर भारत की बड़ी कार्रवाई

Hormuz संकट के बीच भारत का बड़ा फैसला: 366 विदेशी जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक
ओमान की खाड़ी में हमले के बाद DG Shipping ने उठाया सख्त कदम, नाविकों की सुरक्षा को बनाया प्राथमिकता-ओमान की खाड़ी में भारतीय जहाज ‘हाजी’ पर हुए हमले और उसके बाद डूबने की घटना ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी के चलते DG Shipping ने 366 विदेशी जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक लगा दी है। सरकार ने साफ कहा है कि नाविकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हाजी जहाज पर हमले के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता-13 मई को ओमान की खाड़ी में ‘हाजी’ जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद वह डूब गया। इस घटना ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सरकार ने इस हमले पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके बाद DG Shipping ने विदेशी जहाजों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।

366 विदेशी जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक-DG Shipping ने 366 विदेशी झंडे वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को काम पर रखने पर प्रतिबंध लगाया है। यह फैसला वेस्ट एशिया में बढ़ते युद्ध और समुद्री तनाव के बीच लिया गया है। सरकार का मानना है कि जिन जहाजों पर सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों का पालन नहीं होता, वहां नाविकों को भेजना खतरनाक है।

जहाज मालिकों पर गंभीर आरोप-कई विदेशी जहाज मालिकों पर नाविकों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप हैं। कुछ नाविकों को महीनों तक वेतन नहीं मिला, कई को समुद्र में छोड़ दिया गया। कुछ जहाज मालिकों पर मौत या लापता होने पर मुआवजा न देने का भी आरोप है। सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है।

क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?-DG Shipping ने कहा कि कई विदेशी जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारत के सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। इसलिए RPSL कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन जहाजों पर नाविकों की भर्ती न करें। सरकार ने कहा कि नाविकों की जान और सम्मान सबसे पहले है, खासकर जब वेस्ट एशिया में युद्ध का खतरा हो।

278 जहाज प्रतिबंधित, 88 ब्लैकलिस्ट-कुल 366 जहाजों में से 278 को Restricted कैटेगरी में रखा गया है, जहां फिलहाल नाविक नहीं भेजे जाएंगे। 88 जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिनके साथ भविष्य में काम करना मुश्किल होगा। सभी RPSL कंपनियों को 14 दिनों में इन जहाजों पर काम कर रहे नाविकों की जानकारी देनी होगी।

सरकार ने आदेश में क्या कहा?-DG Shipping ने आदेश में कहा कि नाविकों को छोड़ने, वेतन रोकने और नियमों के उल्लंघन के कारण यह फैसला लिया गया है। जब तक जहाज नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक नाविकों की भर्ती पर रोक जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता खतरा-फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात खराब हो रहे हैं। कई जहाज सुरक्षा संकट और सप्लाई बाधा के कारण फंसे हैं। मई 2026 तक कम से कम 8 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। हजारों नाविक अभी भी समुद्र में फंसे हैं और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता है।

कई नाविक बिना वेतन और भोजन के फंसे-संघर्ष के बीच कई जहाज मालिकों ने कर्मचारियों की मदद बंद कर दी है। कई नाविक बिना भोजन, वेतन और सुरक्षित वापसी के समुद्र में फंसे हैं। उनकी स्थिति गंभीर है। सरकार ऐसे जहाज मालिकों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है।

आगे क्या कर सकती है सरकार?-अब नजर है कि प्रतिबंधित जहाज नियमों का पालन करते हैं या नहीं। अगर नहीं, तो सरकार और कड़ी कार्रवाई कर सकती है। भारत सरकार ने साफ किया है कि नाविकों के हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

 

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