Google Analytics Meta Pixel
International
Trending

फिर बढ़ा होर्मुज संकट: ईरान के फैसले से तेल बाजार में मची हलचल, भारत समेत दुनिया की बढ़ी चिंता

 

फिर बढ़ा होर्मुज संकट: ईरान के फैसले से तेल बाजार में मची हलचल, भारत समेत दुनिया की बढ़ी चिंता-होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइनों में से एक है, फिर से विवादों में आ गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग को बंद करने का दावा किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी चिंता पैदा हो गई है। रविवार को इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। यह सिर्फ मध्य पूर्व का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है। दुनिया की नजरें अब अमेरिका-ईरान वार्ता और क्षेत्रीय स्थिति पर टिकी हैं।

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में आई बड़ी गिरावट-
रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज ही गुजर पाए, जो शनिवार के 26 जहाजों की तुलना में काफी कम है। इनमें तीन बड़े कच्चा तेल वाहक जहाज भी शामिल थे, जो सऊदी अरब से तेल लेकर जा रहे थे। इस कमी को ऊर्जा बाजार के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कुछ जहाज ट्रांसपोंडर बंद कर सकते हैं, लेकिन यह आंकड़ा क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

ईरान ने फिर क्यों बंद किया होर्मुज?-हाल ही में ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जिससे होर्मुज मार्ग पर लगी रोक हट गई थी। लेकिन अब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल के लेबनान में हमलों और अमेरिका-इजरायल के शांति समझौते के उल्लंघन के कारण इस मार्ग को फिर से बंद करने का दावा किया है। इस घोषणा ने वैश्विक बाजार में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

अमेरिका और ईरान के दावों में क्यों है अंतर?-जहां ईरान इस मार्ग को बंद करने की बात कह रहा है, वहीं अमेरिकी सेना का कहना है कि व्यावसायिक जहाज अभी भी इस मार्ग से गुजर रहे हैं। इस वजह से होर्मुज की असली स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और शिपिंग कंपनियां आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार कर रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में जहाजों की संख्या और तेल लोडिंग के आंकड़े स्थिति की सही तस्वीर देंगे।

भारत और एशियाई देशों पर क्या पड़ सकता है असर?-होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल का मुख्य मार्ग है, जो कई एशियाई देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा यहां से आयात करता है। अगर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और महंगाई बढ़ेगी। इसलिए भारत समेत कई देश इस संकट पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

तेल कंपनियां बना रही हैं वैकल्पिक रणनीति-खाड़ी क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियां संभावित बाधाओं से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम कर रही हैं। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और कुवैत पेट्रोलियम ने ऐसे टेंडर जारी किए हैं, जिनमें तेल को होर्मुज के अंदर और बाहर से लोड करने का विकल्प है। इसका मकसद तेल आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव बढ़ने पर तेल उत्पादक देश वैकल्पिक समुद्री मार्गों और बंदरगाहों का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं।

आगे क्या हो सकता है?-दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं पर टिकी हैं। दोनों देश 60 दिन के युद्धविराम के दौरान समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लेबनान और इजरायल से जुड़े हालिया घटनाक्रम स्थिति को जटिल बना रहे हैं। ऊर्जा बाजार, निवेशक और शिपिंग कंपनियां अगले कुछ दिनों में आंकड़ों का इंतजार कर रही हैं। अगर जहाजों की आवाजाही सामान्य रही तो बाजार को राहत मिलेगी, वरना तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है। यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेगा।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button