ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्लान: क्या अब और बढ़ेगा मिडिल ईस्ट में तनाव?

ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव: मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव?-मिडिल ईस्ट की राजनीति फिर से गर्मा गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 14 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान इस प्रस्ताव के जरिए युद्धविराम को स्थायी समझौते में बदलना चाहता था, लेकिन ट्रंप ने इसे नाकाफी बताते हुए साफ कर दिया कि अभी कोई नरमी नहीं होगी।
ट्रंप ने क्यों ठुकराया ईरान का प्रस्ताव?-ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को ध्यान से देखा, लेकिन यह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उनका मानना है कि ईरान बातचीत की बात तो करता है, लेकिन असल में अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। ट्रंप ने कहा कि पिछले दशकों में ईरान की गतिविधियों को देखते हुए उसे जवाबदेह ठहराना जरूरी है, इसलिए यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।
ईरान का तीन चरणों वाला शांति प्लान-ईरान ने 30 दिनों के भीतर हालात सामान्य करने के लिए तीन चरणों की योजना दी थी। पहले चरण में युद्धविराम लागू करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए खोलना था। दूसरे चरण में यूरेनियम संवर्धन पर 15 साल की रोक का प्रस्ताव था। तीसरे चरण में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अरब देशों के साथ मिलकर ढांचा तैयार करने की बात कही गई थी।
परमाणु मुद्दे पर क्यों अटका मामला?-असल विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार पर सख्त और पारदर्शी नियंत्रण लगाए। लेकिन ईरान इस मुद्दे को टालने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी है और बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही।
इजरायल और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर-यह मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इजरायल की सुरक्षा भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। अमेरिका ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों को लेकर सतर्क है और किसी भी जोखिम से बचना चाहता है। इसलिए ट्रंप का फैसला इजरायल की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी समझा जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?-ट्रंप के इस फैसले से साफ है कि फिलहाल बातचीत आसान नहीं है। अगर ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा रहता है और अमेरिका भी सख्त रुख बनाए रखता है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। इस क्षेत्र की स्थिति और जटिल हो सकती है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।



