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महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: मुंबई में महामुकाबला, फडणवीस का बड़ा दावा, ठाकरे बंधुओं की अग्निपरीक्षा

महाराष्ट्र के 29 नगर निगम चुनाव: मुंबई पर सबसे ज्यादा नजर, राजनीति का नया रंग-महाराष्ट्र में 15 जनवरी को 29 नगर निगमों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा ध्यान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर है। यहां बीजेपी नेतृत्व वाली महायुति और ठाकरे गुट आमने-सामने हैं। यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक ताकत का भी बड़ा केंद्र माना जाता है। इस ब्लॉग में हम चुनाव की पूरी तस्वीर विस्तार से समझेंगे।

फडणवीस का बड़ा दावा: राज ठाकरे होंगे सबसे ज्यादा नुकसान में-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव से पहले कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन करने से मनसे प्रमुख राज ठाकरे को सबसे बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में एनसीपी के दोनों गुटों के गठबंधन को केवल स्थानीय राजनीति बताया और इसे राज्य स्तर पर असरदार नहीं माना।

महायुति का आक्रामक प्रचार, एनसीपी को प्रचार से दूर रखा गया-फडणवीस ने पूरे राज्य में महायुति के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया। इस गठबंधन में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना मुख्य चेहरे हैं। रणनीति के तहत गैर-हिंदू वोटरों तक पहुंचने के लिए एनसीपी को कई जगह प्रचार से अलग रखा गया, ताकि चुनावी समीकरण बेहतर बनाए जा सकें।

 शिंदे गुट की पहली बीएमसी परीक्षा, 25 साल बाद बड़ा बदलाव-यह चुनाव शिंदे गुट की शिवसेना के लिए खास है क्योंकि 2022 में पार्टी टूटने के बाद यह उनकी पहली बीएमसी लड़ाई है। पहले अविभाजित शिवसेना ने 25 साल तक बीएमसी पर कब्जा रखा था। अब देखना होगा कि नाम और चुनाव चिन्ह मिलने के बाद शिंदे गुट मुंबई में कितना प्रभाव दिखा पाता है।

15 जनवरी को वोटिंग, 16 जनवरी को नतीजे घोषित होंगे-राज्यभर में 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक मतदान होगा। करीब 3.48 करोड़ मतदाता 15,931 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। मुंबई में 1,700 और पुणे में 1,166 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना 16 जनवरी को होगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मुंबई में 25 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात-मुंबई में चुनाव को लेकर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बीएमसी चुनाव और मतगणना के लिए 25 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारी भी निगरानी में रहेंगे। बाकी 28 नगर निगमों में बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली होने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

ठाकरे बंधुओं की 20 साल बाद सियासी साथ वापसी-चुनाव से पहले उद्धव और राज ठाकरे करीब दो दशक बाद एक मंच पर आए। उनका मकसद मराठी वोटों को एकजुट करना है। वहीं पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में एनसीपी के दोनों गुटों ने स्थानीय स्तर पर गठबंधन किया, जिससे मुकाबला और पेचीदा हो गया है।

कांग्रेस ने बदली रणनीति, नए सहयोगियों के साथ मैदान में उतरी-मुंबई में कांग्रेस ने महाविकास आघाड़ी से अलग होकर अलग रणनीति अपनाई है। उसने प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी और राष्ट्रीय समाज पक्ष के साथ गठबंधन किया है। नागपुर में पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है। राज्यभर में कांग्रेस ने 1,263 उम्मीदवार उतारे हैं।

 छह साल बाद हो रहे चुनाव, कई बड़े शहर रणभूमि बने-इन नगर निगमों के चुनाव छह साल बाद हो रहे हैं क्योंकि अधिकतर निकायों का कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच खत्म हो चुका था। इनमें नौ निगम मुंबई महानगर क्षेत्र में हैं। मुकाबले के बड़े केंद्रों में मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, नागपुर, कोल्हापुर और नवी मुंबई शामिल हैं।

स्टार प्रचारकों की फौज मैदान में, चुनावी जंग तेज-महायुति की ओर से फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने जोरदार प्रचार किया। वहीं उद्धव और राज ठाकरे ने मुंबई, ठाणे, नासिक और संभाजीनगर पर ज्यादा ध्यान दिया। तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और तमिलनाडु बीजेपी नेता के अन्नामलाई भी प्रचार में सक्रिय रहे।

 महिलाओं के वादों पर फोकस, घोषणापत्र बने हथियार-इस बार सभी प्रमुख दलों ने महिलाओं से जुड़े वादे खास तौर पर किए। महायुति ने BEST बसों में महिलाओं को 50% किराया छूट देने का वादा किया। ठाकरे बंधुओं ने घरेलू कामगार महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता और 700 वर्गफुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफी का ऐलान किया।

कांग्रेस का एजेंडा: प्रदूषण, परिवहन और आर्थिक सुधार-कांग्रेस ने महिलाओं के बजाय शहर की बुनियादी समस्याओं पर जोर दिया है। मुंबई के प्रदूषण से लड़ने, BEST बस बेड़े को मजबूत करने और महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति सुधारने को प्राथमिकता बताया है। उनका मानना है कि बिना मजबूत सिस्टम के विकास अधूरा रहेगा।

 मेयर की कुर्सी पर सियासी संग्राम, हिंदू-मराठी मेयर का वादा-चुनाव प्रचार के दौरान मेयर पद को लेकर सियासत तेज रही। बीजेपी ने कहा कि अगर शिवसेना (यूबीटी) जीती तो मुंबई को मुस्लिम मेयर मिल सकता है। ठाकरे गुट ने मराठी मेयर का भरोसा दिलाया। फडणवीस ने भी कहा कि अगला मेयर हिंदू और मराठी ही होगा।

 उम्मीदवारों की संख्या और पार्टी की स्थिति-मुंबई के 227 वार्डों में बीजेपी ने 137, शिंदे गुट की शिवसेना ने 90, एनसीपी ने 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 163, मनसे ने 52, कांग्रेस ने 143 और वीबीए ने 46 उम्मीदवार मैदान में हैं।

चुनाव खत्म, बयानबाजी तेज, राजनीति में नया मोड़-प्रचार खत्म होने के बाद फडणवीस ने दोहराया कि राज ठाकरे इस गठबंधन में सबसे बड़े नुकसान में रहेंगे। उन्होंने एनसीपी गुटों की नजदीकी को मामूली बताया और कहा कि असली राजनीति चुनाव के बाद दिखेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी महाराष्ट्र की राजनीति की धुरी बनी रहेगी।

भविष्य की राजनीति पर नजर, नतीजों से बदलेगा समीकरण-फडणवीस ने कहा कि चुनावी हार किसी पार्टी का अंत नहीं होती। जो दोबारा खड़े होने की कोशिश करता है, वह लौट सकता है। अब सबकी निगाहें 16 जनवरी पर हैं, जब पता चलेगा कि महाराष्ट्र के शहरों में जनता ने किसे अपना भरोसा दिया है। महाराष्ट्र के 29 नगर निगम चुनाव न केवल राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, बल्कि राज्य की सत्ता और आर्थिक ताकत पर भी असर डालेंगे। मुंबई जैसे बड़े शहर में चुनाव का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस ब्लॉग के जरिए हमने चुनाव की पूरी तस्वीर सरल भाषा में समझाने की कोशिश की है ताकि आप इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना को बेहतर समझ सकें।

 

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