“अबकी बार तेजस्वी सरकार? लालू यादव का इमोशनल संदेश और RJD की चुनावी रणनीति”

बिहार में सत्ता संग्राम: तेजस्वी बनाम नीतीश?-बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने साफ कर दिया है कि अगली बार बिहार में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि आरएसएस और नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी है।
लालू का जोशीला संदेश: इतिहास से सबक-अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद लालू प्रसाद यादव पार्टी की राज्य परिषद बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि कैसे 1979 में करपुरी ठाकुर की सरकार को आरएसएस समर्थकों ने गिरा दिया था। लालू का मानना है कि इतिहास से सबक लेने का वक्त आ गया है और इस बार आरजेडी को सत्ता में लाना है। उन्होंने मंगनीलाल मंडल को बिहार आरजेडी का अध्यक्ष भी चुना।
तेजस्वी का नया नारा: ‘2005 से 2025, बहुत हुआ नीतीश’-तेजस्वी यादव ने जोश से भरे भाषण में एक नया नारा दिया – “2005 से 2025, बहुत हुआ नीतीश”। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद की शुरुआत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी ताकत से महागठबंधन की सरकार बनाने में योगदान दें। उन्होंने अपनी पिछली सरकार के कामों का भी जिक्र किया और आने वाले समय के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया।
तेजस्वी की योजनाएँ और वादे-तेजस्वी ने अपनी पिछली 17 महीनों की सरकार में किए गए कामों का जिक्र किया, जिसमें नौकरी के अवसर और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने 100% डोमिसाइल नीति और ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत देने का वादा दोहराया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर काम करने और चापलूसी से दूर रहने की सलाह दी।
पीएम मोदी पर तंज और ‘महा जंगलराज’-तेजस्वी ने पीएम मोदी के बिहार दौरे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को कानून व्यवस्था और परिवारवाद पर बात करने से पहले अपने ही घर के बाहर सुबह हुई गोलीबारी पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में अब ‘महा जंगलराज’ है।
NDA पर तीखा हमला: ‘नेशनल दामाद आयोग’- तेजस्वी ने NDA पर निशाना साधते हुए कहा कि विभिन्न आयोगों और बोर्डों में अब नेताओं के रिश्तेदारों की नियुक्ति हो रही है। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी के दामाद को आरएसएस कोटे से सदस्य बनाया गया है, जिससे साफ है कि जेडीयू जैसी पार्टियों को बीजेपी ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है।



