नेपाल में उभरती Gen-Z क्रांति: क्यों ‘NepoKids’ बने गुस्से का सबसे बड़ा कारण?

नेपाल_का_गुस्सा: जब नेताओं के बच्चे बने युवाओं के निशाने पर!
नेपाल की राजनीति में भूचाल: आखिर क्यों भड़का युवाओं का गुस्सा?-आजकल नेपाल में माहौल काफी गरमाया हुआ है। देश अपनी राजनीति के सबसे बड़े संकटों में से एक से गुजर रहा है। चारों तरफ भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर पाबंदी और परिवारवाद के खिलाफ युवाओं की आवाज़ बुलंद हो रही है। इस पूरे हंगामे की वजह से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी अपना पद छोड़ना पड़ा। लेकिन इस सब की शुरुआत कैसे हुई? दरअसल, सोशल मीडिया पर #NepoKids ट्रेंड हुआ, जिसने नेताओं और उनके बच्चों की आलीशान ज़िन्दगी को सबके सामने लाकर रख दिया। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर युवाओं को इतना गुस्सा क्यों आ रहा है और वे किन नेताओं के बच्चों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह आंदोलन सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई बन गया है, जहाँ आम जनता अब नेताओं के बच्चों की ‘शाही’ ज़िन्दगी को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है।
‘नेपो किड्स’ पर क्यों भड़की जनता?-नेपाल की नई पीढ़ी का सीधा आरोप है कि देश के नेता अपने बच्चों को जनता के पैसों पर ऐश करा रहे हैं। बिना किसी मेहनत या काबिलियत के, ये बच्चे सत्ता, नाम और सारी सुख-सुविधाएं पा लेते हैं। वहीं, आम युवा अच्छी नौकरी और पढ़ाई के लिए दिन-रात संघर्ष करते हैं। नेताओं के बच्चे महंगी गाड़ियों में घूमते हैं, विदेश की सैर करते हैं और हर तरह की लग्जरी लाइफ जीते हैं। इसी बात ने युवाओं को इतना भड़काया कि आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक हो गया। कई जगहों पर नेताओं और उनके परिवारों के घरों को आग के हवाले भी कर दिया गया। यह साफ़ दिखाता है कि अब लोग परिवारवाद और भ्रष्टाचार को और बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर भी उतर आया, जिसने पूरी राजनीतिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है।
सौगत थापा: कानून मंत्री के बेटे पर लगे परिवारवाद के आरोप-नेताओं के बच्चों की फेहरिस्त में सबसे पहला नाम आता है सौगत थापा का, जो पूर्व कानून मंत्री बिंदु कुमार थापा के बेटे हैं। सौगत ने ‘चैंबर ऑफ कॉमर्स’ का चुनाव अपने पिता की राजनीतिक पहुँच और ताकत के दम पर जीता। लोगों का कहना है कि इस पद के लिए उनके पास कोई खास योग्यता नहीं थी, फिर भी उन्होंने यह जीत हासिल की। उनकी महंगी गाड़ियां, आलीशान जीवनशैली और विदेश यात्राएं हमेशा चर्चा का विषय रही हैं। यही वजह है कि युवा उन्हें परिवारवाद की राजनीति का एक बड़ा उदाहरण मानते हैं। सोशल मीडिया पर #NepoKids के तहत उनका नाम सबसे ज़्यादा लिया गया, जिससे साफ जाहिर होता है कि जनता अब इस तरह के nepotism को बर्दाश्त नहीं करेगी।
बीना मगर: पूर्व PM प्रचंड की बहू पर सरकारी पैसे उड़ाने का इल्ज़ाम-पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की बहू और पूर्व जल मंत्री बीना मगर भी इस विवाद से अछूती नहीं रहीं। उन पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने सरकारी खजाने से विदेश यात्राएं कीं और ग्रामीण जल योजनाओं के बजट में गड़बड़ी की। युवाओं का यह भी कहना है कि बीना ने अपने प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का इस्तेमाल सिर्फ अपने निजी फायदों के लिए किया। #NepoKids अभियान में उनका नाम बार-बार सामने आया, जिससे जनता का गुस्सा और भी भड़क उठा। यह मामला दिखाता है कि कैसे सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है और आम जनता की गाढ़ी कमाई को कैसे उड़ाया जा रहा है।
शिवाना श्रेष्ठा: देउबा परिवार की बहू और उनकी लग्जरी लाइफस्टाइल-पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के बेटे जयवीर सिंह देउबा की पत्नी और जानी-मानी सिंगर शिवाना श्रेष्ठा भी युवाओं के निशाने पर आ गईं। सोशल मीडिया पर उनकी करोड़ों की संपत्ति, महंगे कपड़े और बेहद आलीशान जीवनशैली की तस्वीरें तेज़ी से वायरल हुईं। लोगों का सीधा आरोप है कि यह सब चमक-दमक आम जनता के टैक्स के पैसों से ही आती है। इसी वजह से शिवाना को भी #NepoKids का एक हिस्सा माना गया और युवाओं ने उनके खिलाफ ज़ोर-शोर से आवाज़ उठाई। यह दिखाता है कि कैसे आम जनता की गाढ़ी कमाई को कुछ लोग अपनी विलासिता पर खर्च कर रहे हैं।
श्रृंखला खतिवड़ा: मिस नेपाल वर्ल्ड पर भी उठे सवाल-नेपाल की मशहूर ब्यूटी क्वीन श्रृंखला खतिवड़ा, जिन्होंने ‘मिस नेपाल वर्ल्ड 2018’ का खिताब जीता था, वे भी इस आंदोलन की चपेट में आ गईं। 29 साल की श्रृंखला, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बिरोध खतिवड़ा की बेटी हैं। युवाओं का आरोप है कि उन्हें मिस नेपाल का ताज भी अपने पिता की राजनीतिक ताकत की वजह से ही मिला। उनकी लग्जरी छुट्टियों और विदेशी यात्राओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं। इस आंदोलन के बाद, उनके इंस्टाग्राम से एक लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया, जो युवाओं के गुस्से को साफ तौर पर दर्शाता है। यह घटना बताती है कि लोग अब योग्यता को प्राथमिकता देना चाहते हैं, न कि पारिवारिक संबंधों को।
प्रचंड की पोती और अन्य ‘नेपो किड्स’ भी रडार पर-युवाओं के गुस्से की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड की पोती स्मिता दहल की महंगे हैंडबैग और डिजाइनर कपड़ों वाली तस्वीरें भी खूब चर्चा में रहीं। वहीं, मिस नेपाल अर्थ सुप्रिया श्रेष्ठा का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ गया। हालांकि सुप्रिया ने सफाई दी कि उनका राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन उनकी लग्जरी लाइफस्टाइल ने उन्हें भी विवादों के घेरे में ला खड़ा किया। यह दिखाता है कि आम जनता अब नेताओं के बच्चों के हर उस काम पर नज़र रख रही है जो कहीं न कहीं सत्ता के दुरुपयोग का संकेत देता हो।
नतीजा: नेपाल एक नए बदलाव की ओर बढ़ रहा है-नेपाल का यह आंदोलन सिर्फ नेताओं के बच्चों की आलोचना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह तो भ्रष्टाचार और पारिवारिक राजनीति के खिलाफ एक बड़ी क्रांति का रूप ले चुका है। युवाओं ने यह साफ कर दिया है कि वे अब सिर्फ दिखावे की राजनीति नहीं चाहते, बल्कि वे ऐसे नेताओं और व्यवस्था को चाहते हैं जो जनता के प्रति जवाबदेह हो। यह गुस्सा आने वाले समय में नेपाल की राजनीति को एक नई और सकारात्मक दिशा दे सकता है, जहाँ योग्यता और मेहनत को महत्व मिलेगा, न कि पारिवारिक पृष्ठभूमि को।



