ईरान में हिंसक प्रदर्शन और बढ़ती मौतों के बीच तनाव, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ी खटास

ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई में अब तक 544 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन के अनुसार, हजारों लोग हिरासत में लिए गए हैं। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है, जिससे युद्ध की आशंका गहराने लगी है।
प्रदर्शन में बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता-मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, अब तक 544 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बल के सदस्य शामिल हैं। हालांकि, इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने की वजह से सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। ईरानी सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
सूचना ब्लैकआउट के बीच सड़कों पर उतरे लोग-देश में सूचना पर रोक के कारण बाहर से हालात जानना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद, राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं। सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शन के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।
व्हाइट हाउस में ईरान को लेकर कड़े विकल्पों पर मंथन-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सुरक्षा टीम ईरान के खिलाफ कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें साइबर हमले से लेकर सैन्य कार्रवाई तक के विकल्प शामिल हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का जवाब बहुत कड़ा होगा और वे मजबूत विकल्पों पर काम कर रहे हैं।
ईरान की धमकी: अमेरिका और इजरायल निशाने पर-ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने अमेरिका और इजरायल को सीधे धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने, सैन्य अड्डे और इजरायल सभी वैध लक्ष्य होंगे। यह बयान तेहरान की सख्त नीति को दर्शाता है।
संसद में गरमाया माहौल, नारेबाजी के बीच बढ़ा तनाव-कालीबाफ के बयान के बाद संसद में सांसदों ने “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए। उन्होंने साफ किया कि ईरान खतरे के किसी भी संकेत पर कार्रवाई करेगा, न कि सिर्फ हमले के बाद। इससे साफ है कि ईरान का रुख और भी सख्त होता जा रहा है।
युद्ध की आशंका, अंतिम फैसला सर्वोच्च नेता के हाथ-हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं कि ईरान हमला करेगा या नहीं, खासकर जब उसकी वायु रक्षा प्रणाली हाल ही में कमजोर हुई है। किसी भी बड़े फैसले की जिम्मेदारी 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पास होगी, जिनका अंतिम निर्णय निर्णायक होगा।
अमेरिकी सेना अलर्ट, खाड़ी में पहले से तैनाती-अमेरिकी सेना ने कहा है कि मध्य पूर्व में उसकी तैनाती हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। जून में ईरान ने कतर के अल उदैद एयर बेस पर हमला किया था। अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट भी बहरीन में पहले से मौजूद है, जो किसी भी स्थिति के लिए सतर्क है।



