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फ्रंट-रनिंग केस में सेबी का बड़ा एक्शन: 12 लोगों पर 5 साल की रोक, 90 लाख का जुर्माना और 1.07 करोड़ की वसूली

सेबी की कड़ी कार्रवाई: 12 लोगों पर 5 साल का बाजार प्रतिबंध और भारी जुर्माना-भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक बड़े फ्रंट-रनिंग मामले में 12 संस्थाओं को अगले पांच साल तक शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही, इन पर कुल 90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर निवेशकों के विश्वास को ठेस पहुंचाई।

फ्रंट-रनिंग क्या है?-फ्रंट-रनिंग का मतलब है कि किसी बड़े क्लाइंट के ऑर्डर की गोपनीय जानकारी लेकर उससे पहले ही ट्रेडिंग कर लेना। इससे पहले कि असली ऑर्डर बाजार में आए, ये लोग मुनाफा कमाने के लिए पहले से ही सौदे कर लेते हैं। सेबी ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी और धोखाधड़ी माना है।

अवैध कमाई की वसूली का आदेश-सेबी ने इन 12 लोगों को 1.07 करोड़ रुपये की अवैध कमाई, उस पर सालाना 12 प्रतिशत ब्याज के साथ, 45 दिनों के अंदर Investor Protection and Education Fund में जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि संयुक्त और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के आधार पर वसूली जाएगी।

जांच में सामने आई बड़ी साजिश-सेबी के 102 पन्नों के आदेश में बताया गया है कि मंगाल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन परेश एन भगत के ऑर्डर उनके डीलर आशीष एस पारेख और राजेश जोशी के जरिए डाले जाते थे। इनके पास बड़ी डील से जुड़ी गोपनीय जानकारी थी, जो उन्होंने नागेंद्र एस दुबे और चिराग अतुल पिठाडिया को दी। इसके बाद ये लोग पहले ही ट्रेडिंग कर मुनाफा पक्का करते थे।

सेबी का सख्त फैसला-सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्शनेय ने स्पष्ट किया कि नोटिसी नंबर 1 से 9 ने मिलकर नोटिसी नंबर 10 से 13 के साथ फ्रंट-रनिंग की। ये सभी ट्रेड गैरकानूनी हैं और निवेशकों के हितों के खिलाफ हैं। इसलिए, इन सभी को पांच साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया गया है।

प्रतिबंधित लोगों के नाम-फ्रंट-रनिंग में शामिल प्रमुख नामों में दीपा आशीष पारेख, कश्मीरा जोशी, निखिल हीराचंद जैन, नागेंद्र एस दुबे एचयूएफ, दिवंगत सुषमा नागेंद्र दुबे के कानूनी वारिस, जगरुति अतुल पिठाडिया और साहिल अतुल पिठाडिया शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हुई है।

गैर-सार्वजनिक जानकारी का दुरुपयोग धोखाधड़ी-सेबी ने साफ कहा है कि बड़े क्लाइंट के ऑर्डर से जुड़ी गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर पहले ट्रेडिंग करना धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। यह PFUTP नियमों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

सख्त पाबंदियां और जुर्माने-सेबी ने 26 दिसंबर 2022 के अंतरिम आदेश से 13 लोगों को पांच साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित किया है। कुछ पर चार साल की पाबंदी भी लगाई गई है। जुर्माने की रकम 5 लाख से 15 लाख रुपये के बीच है।

दिवंगत आरोपी के खिलाफ फैसला-दिवंगत सुषमा नागेंद्र दुबे के खिलाफ सेबी ने ज्यादातर निर्देश रद्द कर दिए हैं, लेकिन उनकी अवैध कमाई की वसूली उनके कानूनी वारिसों के जरिए जारी रहेगी।

मामला कैसे सामने आया?-यह मामला तब उजागर हुआ जब एनएसई ने संदिग्ध फ्रंट-रनिंग की रिपोर्ट सेबी को भेजी। इसके बाद दिसंबर 2022 में अंतरिम और दिसंबर 2023 में पुष्टि आदेश जारी हुआ। जांच अप्रैल से दिसंबर 2021 की ट्रेडिंग पर आधारित थी। सेबी की यह कार्रवाई बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है। फ्रंट-रनिंग जैसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए नियामक ने कड़ी सजा दी है, जिससे भविष्य में ऐसे गैरकानूनी कामों पर रोक लगेगी और बाजार में विश्वास बढ़ेगा।

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