मुम्ब्रा को हरा कर देंगे: AIMIM पार्षद सहर शेख के बयान से उठा विवाद, जानिए पूरी कहानी

जीत के जश्न में निकला विवाद-ठाणे नगर निगम चुनाव में 22 साल की AIMIM पार्षद सहर शेख ने मुम्ब्रा से जीत हासिल की। जीत के उत्साह में उन्होंने कहा, “मुम्ब्रा को हरा कर देंगे,” जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विवाद का कारण बन गया।
सहर शेख का बयान क्या था?- अपने विजय भाषण में सहर ने समर्थकों से कहा कि अगली बार चुनाव में मुम्ब्रा को इस तरह “हरा” कर देना कि विरोधी पूरी तरह हार जाएं और AIMIM के सभी उम्मीदवार जीतें। उन्होंने इसे पार्टी की ताकत और अल्लाह से मिली शक्ति बताया।
AIMIM की मुम्ब्रा में बड़ी सफलता- ठाणे नगर निगम की 131 सदस्यीय परिषद में AIMIM ने पांच सीटें जीती हैं। मुम्ब्रा, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां से सहर शेख की जीत पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी जीत के जोश में उनका बयान विवादित हो गया।
सहर शेख की राजनीतिक पृष्ठभूमि-सहर शेख युनुस शेख की बेटी हैं, जो पूर्व में विधायक जितेंद्र आव्हाड के करीबी सहयोगी रहे हैं। युनुस शेख और आव्हाड के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है, जिसका असर स्थानीय राजनीति पर भी पड़ा है।
बयान वायरल होते ही शुरू हुई बहस-सहर शेख के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की, तो कुछ ने इसे राजनीतिक उकसावे के रूप में देखा। विवाद बढ़ने पर सहर को सफाई देनी पड़ी।
सहर शेख की सफाई: ‘हरा’ मतलब पार्टी का झंडा-सहर ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी समुदाय की ओर नहीं था, बल्कि AIMIM के झंडे के हरे रंग की बात थी। उन्होंने कहा कि अगर झंडा केसरिया होता तो वे वैसा ही कहतीं। उनका मकसद केवल राजनीतिक मजबूती दिखाना था।
मेरा मकसद सभी सीटें जीतना है-सहर ने कहा कि उनका उद्देश्य मुम्ब्रा की सभी 25 सीटें जीतना है। वे खुद को धर्मनिरपेक्ष मानती हैं और रंगों को किसी एक समुदाय का नहीं मानतीं। उनका कहना है कि विपक्ष ने इसे साम्प्रदायिक मुद्दा बना दिया।
AIMIM की प्रतिक्रिया: जीत के जश्न में निकला बयान-AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि यह बयान जीत के उत्साह में दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य पार्टियां ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं तो विवाद क्यों नहीं होता, लेकिन AIMIM के मामले में विवाद खड़ा किया जा रहा है।
शिवसेना का पलटवार और सवाल-शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने सहर शेख से साफ जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अगर बात हरियाली की है तो ठीक है, लेकिन धर्म या संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटना गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजनीति में बयानबाजी की नई बहस-इस पूरे विवाद ने फिर से दिखा दिया कि चुनाव जीत के बाद दिए गए शब्द किस तरह राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकते हैं। सहर शेख की सफाई के बाद भी बहस थमी नहीं है और मुम्ब्रा की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।



