भारत का 77वां गणतंत्र दिवस: एक गौरवशाली और यादगार उत्सव

भारत आज अपनी लोकतांत्रिक यात्रा के 77वें गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा है। यह दिन हमें हमारे संविधान की ताकत, देशभक्ति और एकता की याद दिलाता है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद से यह दिन हर साल पूरे देश में गर्व और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार का समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य रूप से आयोजित किया गया है, जहां देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक देखने को मिल रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय महत्त्व-इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह की अगुवाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर रही हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। उनकी उपस्थिति इस राष्ट्रीय उत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी महत्वपूर्ण बनाती है। यह दर्शाता है कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत और सांस्कृतिक समृद्धि विश्व में कितनी सम्मानित है।
ध्वजारोहण और राष्ट्रीय समारोह की शुरुआत-गणतंत्र दिवस का मुख्य कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने से शुरू होता है। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ की ओर जुलूस निकलता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 10:00 से 10:30 बजे के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराती हैं। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान गाया जाता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह वह क्षण होता है जब पूरा देश तिरंगे के सम्मान में एक साथ खड़ा होकर अपने वीरों और संविधान को नमन करता है।
भव्य परेड: देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रदर्शन-गणतंत्र दिवस परेड सुबह 9:30 बजे शुरू होती है। इस बार परेड में कुल 6,065 प्रतिभागी शामिल हैं, जिनका नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भावनिश कुमार कर रहे हैं। 12 मिलिट्री बैंड और 8 पाइप बैंड देशभक्ति की धुनों से माहौल को जीवंत कर देते हैं। सशस्त्र बलों की टुकड़ियां, झांकियां और सांस्कृतिक दल मिलकर इस परेड को यादगार बनाते हैं। यह परेड भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता का शानदार प्रदर्शन है।
झांकियों में भारत की विविधता और विकास की कहानी-इस साल कुल 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की गई हैं। इनमें 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हैं, जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से बनाई गई हैं। ये झांकियां भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, आधुनिक उपलब्धियों और सामाजिक योजनाओं को दर्शाती हैं। हर झांकी एक अलग कहानी कहती है, जो देश की एकता और प्रगति को बयां करती है।
घर बैठे देखें गणतंत्र दिवस समारोह का लाइव प्रसारण-जो लोग दिल्ली जाकर परेड नहीं देख पा रहे हैं, वे घर बैठे दूरदर्शन के DD National चैनल या दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के आधिकारिक YouTube चैनलों पर लाइव प्रसारण का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा, प्रमुख टीवी न्यूज चैनल भी इस कार्यक्रम का प्रसारण कर रहे हैं। दर्शकों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से टिकट उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 20 से 100 रुपये के बीच है।
ध्वजारोहण का सही समय और महत्व-अगर आप अपने घर, स्कूल या ऑफिस में ध्वजारोहण करना चाहते हैं, तो सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। सरकारी नियमों के अनुसार, ध्वज सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही फहराया जाना चाहिए। इस समय राष्ट्रगान का सम्मान करना और तिरंगे की मर्यादा बनाए रखना जरूरी होता है। यह एक ऐसा पल होता है जब परिवार और समुदाय देश के प्रति गर्व और सम्मान महसूस करते हैं।
देशभर में देशभक्ति की लहर-77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण प्रतियोगिताएं और परेड आयोजित की जा रही हैं। यह दिन केवल एक औपचारिक पर्व नहीं, बल्कि संविधान के प्रति सम्मान, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रतीक है। कर्तव्य पथ से लेकर देश के छोटे-छोटे गांवों तक तिरंगे की शान और भारत की गरिमा पूरे गर्व के साथ नजर आ रही है।



