पिनाराई विजयन बने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता, राजनीति में बड़ा बदलाव

CPM ने चुनाव हार के बाद पिनाराई विजयन को विपक्ष का नेता बनाया, केरल की राजनीति में नई शुरुआत-केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। लगातार दो बार मुख्यमंत्री रहने के बाद अब पिनाराई विजयन विधानसभा में विपक्ष के नेता बनेंगे। CPM की राज्य समिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है। LDF को हालिया चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद यह कदम पार्टी की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
CPM की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला-गुरुवार को हुई CPM राज्य समिति की बैठक में पिनाराई विजयन को विपक्ष का नेता बनाने पर सहमति बनी। पार्टी के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं थीं, लेकिन अंत में पार्टी ने अनुभवी विजयन पर भरोसा जताया। यह फैसला LDF की विपक्ष में मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है।
चुनाव हार के बाद पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांगें-चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी समर्थकों के बीच नेतृत्व बदलने की आवाजें तेज हुईं। कई कार्यकर्ताओं का मानना था कि पार्टी को नए चेहरे के साथ आगे बढ़ना चाहिए। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा थी कि पूर्व वित्त मंत्री एन बालगोपाल को विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है, लेकिन अंत में पार्टी ने पिनाराई विजयन को ही यह जिम्मेदारी दी।
पहली बार विपक्ष की भूमिका निभाएंगे पिनाराई विजयन-पिनाराई विजयन लगातार दस साल तक केरल के मुख्यमंत्री रहे और दो कार्यकाल पूरे किए। अब पहली बार वे विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में नजर आएंगे। CPM पोलित ब्यूरो के सदस्य और पार्टी के प्रभावशाली नेता विजयन विपक्ष में रहते हुए भी सरकार को कड़ी चुनौती देंगे। उनकी राजनीतिक पकड़ विपक्ष में भी मजबूत बनी रहेगी।
विधानसभा में नया राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा-पिछली विधानसभा में वी डी सतीशन विपक्ष के नेता थे और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ कई बार बहस करते नजर आए थे। अब स्थिति उलट गई है, क्योंकि इस बार वी डी सतीशन मुख्यमंत्री बनेंगे और विजयन विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच विधानसभा में तीखा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
विधानसभा में बदला राजनीतिक समीकरण-इस चुनाव में LDF की सीटें 99 से घटकर 35 रह गई हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने 102 सीटें हासिल की हैं। बीजेपी को भी तीन सीटें मिली हैं। इस बदलाव के साथ केरल विधानसभा का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है और विपक्ष की भूमिका निभाना LDF के लिए आसान नहीं होगा।
विपक्ष में रहकर क्या होगी विजयन की रणनीति?-अब सबकी नजर पिनाराई विजयन की विपक्ष में रणनीति पर टिकी है। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई बड़े फैसले लिए और प्रशासनिक शैली के लिए पहचाने गए। विपक्ष में रहते हुए वे सरकार को मुद्दों पर घेरने और पार्टी को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगे। आने वाले समय में केरल की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।



