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नांदेड़ की रैली में ओवैसी का गरजता बयान: वक्फ एक्ट पर तीखा हमला और वोट की अपील

नांदेड़ में आयोजित जनसभा में AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने नया वक्फ कानून मुसलमानों की धार्मिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश बताया। ओवैसी ने कहा कि इस कानून के जरिए मस्जिदों और पुरानी दरगाहों की मिल्कियत पर सवाल उठाए जा रहे हैं और सरकार इन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में देने की कोशिश कर रही है। उनका मानना है कि यह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि समुदाय की आस्था पर हमला है।

नगर निगम चुनाव में भाजपा, शिंदे शिवसेना और अजित पवार गुट को हराने की अपील-ओवैसी ने नांदेड़-वाघाला नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि वे 15 जनवरी को होने वाले चुनाव में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के खिलाफ वोट करें। उनका कहना था कि यह चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने का नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड और धार्मिक संस्थाओं के भविष्य से जुड़ा है। AIMIM ने इस चुनाव में 37 उम्मीदवार उतारे हैं और वे चाहते हैं कि मुसलमान अपने हक के लिए मजबूत संदेश दें।

‘हम इस देश के बराबरी के नागरिक हैं’ — ओवैसी का दो टूक संदेश-अपने भाषण में ओवैसी ने बार-बार कहा कि मुसलमान न तो किरायेदार हैं और न ही दूसरे दर्जे के नागरिक। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह देश मुसलमानों का भी है और संविधान ने उन्हें बराबरी का हक दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ एक्ट का मकसद मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को कानूनी उलझनों में फंसाकर उनकी पहचान खत्म करना है। ओवैसी ने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट से इस कानून के खिलाफ आवाज उठाएं।

वोटर लिस्ट और SIR की प्रक्रिया पर चेतावनी, नाम बनाए रखने की अपील-ओवैसी ने मंच से कहा कि महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया होने वाली है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोग चाहते हैं कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहे, तो उन्हें इस चुनाव में सक्रिय होकर वोट करना होगा। उन्होंने युवाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं से खास अपील की कि वे सिर्फ भाषण सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उतरकर अपने हक के लिए मतदान करें।

धार्मिक मुद्दों पर राजनीति के आरोपों का जवाब, अजित पवार पर निशाना-ओवैसी ने उन आलोचनाओं का जवाब दिया जिनमें कहा जाता है कि वे राजनीति में मस्जिद और दरगाह का नाम लाते हैं। उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता इन जगहों से संविधान की आज़ादी से जुड़ा है, जो सोचने, बोलने और मानने का अधिकार देती है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी टिप्पणी की कि अगर उनके जैसे आरोप किसी मुसलमान पर होते, तो उसे जेल में रखा जाता। उन्होंने दोहरे मापदंड की निंदा की और कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए।

अशोक चव्हाण, मुंबई ब्लास्ट और कांग्रेस पर सवाल-ओवैसी ने भाजपा सांसद अशोक चव्हाण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी और राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया। उन्होंने 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट का जिक्र किया जिसमें 185 लोग मरे और कई मुस्लिम युवक जेल में रहे। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उस वक्त सत्ता में रहते हुए उसने क्या कदम उठाए। ओवैसी ने कहा कि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला और आरोपियों के परिवारों को सुकून नहीं मिला।

‘डर फैलाने वालों से मत डरिए’ — आज़ादी की लड़ाई का हवाला-अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने दोहराया कि मुसलमान इस देश के बराबरी के नागरिक हैं और किसी को उन्हें डराने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोग हिंसा फैलाकर डराना चाहते हैं, तो उस डर को दिल तक न पहुंचने दें। ओवैसी ने याद दिलाया कि आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया, जेल गए और काला पानी की सजा भुगती। यह इतिहास बताता है कि मुसलमान इस देश के निर्माण में बराबरी के भागीदार हैं।

 

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