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बीएमसी चुनाव में शिवसेना का 30 साल पुराना वर्चस्व टूटा, बीजेपी ने मारी बाजी

करीब तीन दशक तक मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर कब्जा जमाए शिवसेना का किला शुक्रवार को ढह गया। बीजेपी ने मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बनकर अपनी ताकत दिखाई। साथ ही पुणे में भी बीजेपी ने एनसीपी गठबंधन को करारी शिकस्त दी। यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है।

बीजेपी गठबंधन ने 227 में से करीब 125 सीटों पर बढ़त बनाई-देश की सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी, जिसका बजट 74,427 करोड़ रुपये है, वहां बीजेपी गठबंधन ने करीब 125 सीटों पर बढ़त बनाई है। मुंबई समेत 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजे शुक्रवार को आए। मतदान में करीब 54.77 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिससे बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई।

शिंदे गुट के साथ मिलकर बीजेपी की पकड़ और मजबूत-डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के अच्छे प्रदर्शन के कारण बीजेपी अब बीएमसी की सत्ता में आने के करीब है। मुंबई की राजनीति में बीजेपी सबसे मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरी है और निगम की कमान उसके हाथों में जाने की संभावना बढ़ गई है।

ठाकरे भाइयों का साथ भी नहीं बचा, बीजेपी ने बढ़त बनाई-करीब 20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे एक साथ आए थे, जिससे मुकाबला हाई-वोल्टेज हो गया था। लेकिन शुरुआती नतीजों ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। बीजेपी की बढ़त लगातार मजबूत होती गई और ठाकरे भाइयों का गठबंधन पिछड़ता गया।

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भी बीजेपी का दबदबा-पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में बीजेपी ने एनसीपी और उसके गुटों को बड़े अंतर से हराया। दोनों शहरों में बीजेपी ने मजबूत बढ़त बनाई, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला।

देवेंद्र फडणवीस बने ‘मैन ऑफ द मोमेंट’-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी ने 2017 की बीएमसी में मिली 82 सीटों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ‘मिशन मुंबई’ के तहत पार्टी ने साफ कर दिया कि अब आर्थिक राजधानी की राजनीति में उसका दबदबा सबसे ज्यादा है।

मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव, विकास पर जोर-कभी शिवसेना का अभेद किला मानी जाने वाली बीएमसी में बीजेपी की जीत मुंबई की राजनीति में नया मोड़ है। अब ‘मराठी अस्मिता’ से आगे बढ़कर विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।

हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी को मिला जनादेश: नितेश राणे-मंत्री नितेश राणे ने कहा कि मुंबई चुनाव में बीजेपी-शिवसेना की मजबूत स्थिति उनके हिंदुत्व एजेंडे पर जनता की मुहर है। उन्होंने कहा, “जो हिंदू की बात करेगा, वही महाराष्ट्र पर राज करेगा।”

गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी की जीत से मचा हलचल-जालना नगर निगम में 2017 की पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले के आरोपी श्रीकांत पांगारकर निर्दलीय पार्षद चुने गए। इस जीत ने राजनीतिक गलियारों में अलग चर्चा छेड़ दी है।

नागपुर में बीजेपी की पुरानी स्थिति दोहराने के आसार-मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गढ़ नागपुर में बीजेपी 2017 जैसे नतीजों की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस ने जोरदार प्रचार किया, लेकिन बड़ा असर नहीं दिखा।

बीजेपी 108 सीटों का रिकॉर्ड पार कर सकती है-151 सदस्यीय नागपुर नगर निगम में बीजेपी 2017 की 108 सीटों के रिकॉर्ड को पार करती नजर आ रही है। रुझानों में पार्टी लगातार मजबूत स्थिति में है।

लातूर में कांग्रेस की बड़ी वापसी-जहां बीजेपी कई शहरों में आगे रही, वहीं लातूर नगर निगम में कांग्रेस ने 70 सदस्यीय निगम में 40 से ज्यादा सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

चुनाव से पहले बने नए राजनीतिक समीकरण-चुनाव से पहले उद्धव-राज ठाकरे का साथ आना और पुणे में एनसीपी गुटों का गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम था। लेकिन जनता ने बीजेपी को ज्यादा समर्थन दिया।

कई साल बाद हुए नगर निगम चुनाव-29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को कई सालों के बाद हुए। ज्यादातर निगमों का कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच खत्म हो चुका था। इनमें से 9 निगम मुंबई महानगर क्षेत्र में आते हैं।

इन शहरों में हुए नगर निगम चुनाव-मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, वसई-विरार, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर, नासिक, अमरावती, सोलापुर, लातूर, जलना, धुले, सांगली, मीरा-भायंदर समेत कुल 29 नगर निगमों में वोटिंग हुई।

 

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