“बाहर वालों की ज़रूरत नहीं, अपने ही काफी हैं” – लालू परिवार पर रोहिणी आचार्य का तीखा वार, विरासत मिटाने का आरोप

रोहिणी आचार्य का परिवार पर खुला गुस्सा: राजद की विरासत पर उठे सवाल-राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक भावुक लेकिन कड़ा पोस्ट लिखा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए अपने परिवार के कुछ लोगों पर राजनीतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। रोहिणी का यह बयान परिवार में चल रही खींचतान को फिर से उजागर करता है।
“अपनों से मिटती जा रही विरासत की पहचान”-रोहिणी ने कहा कि जिस विरासत को बनाने में सालों की मेहनत लगी, आज वही विरासत खत्म करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग जो इस विरासत को पहचान और अस्तित्व देते थे, उनके निशान तक मिटाए जा रहे हैं, जो उनके लिए बेहद दुखद है।
अहंकार की छाया में छिपी सोच की अंधकारमय दुनिया-अपने पोस्ट में रोहिणी ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि जब अहंकार हावी हो जाता है, तो इंसान की समझ पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में विनाशकारी ताकतें उसकी आंख, नाक और कान बन जाती हैं, जो सही सोच को दबा देती हैं।
तेज प्रताप यादव को लेकर नाराज़गी की चर्चाएं-राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि रोहिणी का यह बयान तेज प्रताप यादव को पार्टी से बाहर करने के फैसले से नाराज़गी से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में किसी व्यक्ति या फैसले का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया है।
राजनीति छोड़ने का ऐलान और परिवार से दूरी-बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद नवंबर में रोहिणी ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह राजनीति से अलग हो रही हैं और परिवार से भी दूरी बना रही हैं, जो उनके मन की गहराई को दर्शाता है।
संजय यादव और रमीज़ का नाम भी आया सामने-अपने पुराने पोस्ट में रोहिणी ने बताया था कि संजय यादव और रमीज़ ने उन्हें राजनीति छोड़ने को कहा था। संजय यादव राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते हैं, जिससे परिवार के अंदर की राजनीति की झलक मिलती है।
किडनी दान से लेकर चुनाव हार तक का सफर-रोहिणी आचार्य ने कुछ साल पहले अपने पिता लालू प्रसाद को किडनी दान की थी, जिससे वे चर्चा में आई थीं। पेशे से डॉक्टर रोहिणी ने पिछले साल सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की बड़ी गिरावट-पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को बड़ा झटका लगा। पार्टी की सीटें 75 से घटकर सिर्फ 24 रह गईं। इसके बाद से पार्टी में अंदरूनी मतभेद और पारिवारिक विवाद की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जो पार्टी की स्थिति को कमजोर कर रही हैं।



